शाहिद को अंतिम विदाई देने के लिए जुटे लोग
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अस्सी के दशक में भारतीय हॉकी के सबसे धुरंधर खिलाड़ियों में शुमार रहे पूर्व ओलंपियन जफर इकबाल ने कहा कि मैंने और शाहिद ने लगभग सात साल तक भारत के लिए खेला। मुझसे छोटा था शाहिद मगर दुनिया से पहले चला गया। बहुत बड़ा खिलाड़ी था... मुकम्मल खिलाड़ी था। हम उसकी सेवाएं नहीं ले सके, इसका हमेशा मलाल रहेगा।
जफर ही अकेले ऐसे खिलाड़ी हैं बीमारी के दौरान जिनकी शाहिद से मुलाकात और बात हो पाई थी। शाहिद से अपनी अंतिम मुलाकात को उन्होंने ‘अमर उजाला’ से साझा करते हुए कहा, बोला था उससे दुनिया को हॉकी स्टिक से डॉज देते रहे, मौत को भी डॉज देकर निकल आओ।
पूर्व ओलंपियन जफर ने कहा कि बहुत हिम्मत वाला था शाहिद। मेदांता में आखिरी मुलाकात के दौरान उसने कहा था, पार्टनर ठीक हो जाऊंगा। उसके हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी। उसे मालूम था कि क्या होने वाला है मगर दोस्तों और घरवालों को जताना नहीं चाहता था। मैंने भी उसका हौसला बढ़ाया था। उसका यूं ही चुपके से चले जाना खल रहा है। भारतीय हॉकी को इससे बड़ा नुकसान नहीं हो सकता।
रुंधे गले से कहा, मैच के बाद जिस कंधे पर सिर रखकर मैंने कई दफा अपनी थकान मिटाई थी, उस शख्स को कंधा देना... बयां नहीं कर सकता कितना दुखी हूं। भावनाएं व्यक्त करने के लिए मेरे पास अल्फाज कम पड़ गए हैं। बहुत याद आएगा शाहिद।