गुजरात के वडोदरा में पुलिस ने एक धार्मिक वाट्सएप ग्रुप का भंडाफोड़ किया था जो अंतरधार्मिक जोड़ों को निशाना बना रहा था। इस ग्रुप के सदस्य ऐसे जोड़ों की पहचान करके उनको परेशान करते थे और वीडियो बनाकर वाट्सएप पर वायरल कर देते थे, इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को पहले गिरफ्तार किया था वहीं अब इस मामले में 14 और लोगों को गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी अधिकारी ने गुरुवार को दी।
पहले 'हुसैनी आर्मी' बाद में वाट्सएप ग्रुप का नाम कर दिया 'आर्मी ऑफ महदी'
वडोदरा पुलिस की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि बुधवार को पकड़े गए 14 लोगों में से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया और नौ को आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में रखा गया। विज्ञप्ति के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कुछ आरोपियों द्वारा कुछ महीने पहले नैतिक पुलिसिंग के लिए बनाए गए 'हुसैनी आर्मी' नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में 500 लोग शामिल हुए थे। इससे धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी पैदा हो सकता था। लेकिन आरोपी ने समूह को 'आर्मी ऑफ महदी' के रूप में फिर से लॉन्च किया।
बुधवार को पकड़े थे तीन लोग
अधिकारियों ने कहा कि मामले की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए, शहर के पुलिस प्रमुख अनुपम सिंह गहलोत ने गुरुवार को इसकी जांच अपराध शाखा को सौंप दी। विज्ञप्ति के अनुसार, बुधवार को गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान अकिब अली सैय्यद, मोहसिन पठान, नोमान शेख, अबरार खान और मोइन शेख के रूप में हुई है और ये सभी वडोदरा शहर के रहने वाले हैं। ये सभी व्हाट्सऐप ग्रुप आर्मी ऑफ महदी के सक्रिय सदस्य थे।
ग्रुप में शामिल थे 500 लोग
अंतरधार्मिक जोड़े का एक वीडियो ‘एक्स’ पर वायरल होने के बाद 28 अगस्त को व्हाट्सऐप ग्रुप 'आर्मी ऑफ महदी' के तीन ग्रुप एडमिन मुस्तकीम शेख, बुरहान सैय्यद और साहिल शेख को गिरफ्तार किया गया। गिरोह ऐसे जोड़ों को निशाना बनाता था और चेतावनी के तौर पर उनके वीडियो 'आर्मी ऑफ महदी' पर साझा करता था। गहलोत ने बताया कि मुख्य आरोपी ने सबसे पहले 'हुसैनी आर्मी' नाम से एक समूह बनाया, जिसमें लगभग 500 सदस्य थे।
उन्होंने कहा कि उनका (आरोपियों) उद्देश्य दूसरे धर्म के पुरुष के साथ देखे जाने पर अपने धर्म की महिलाओं पर नजर रखना था। सदस्य ऐसे जोड़ों के वाहन के नंबर का उपयोग करके उनकी गतिविधियों पर नजर रखते थे और यह जानकारी जोड़ा जहां से गुजरता था, उस क्षेत्र में रहने वाले ग्रुप के अन्य सदस्यों को देते थे।
ऐसे समूह आणंद, अहमदाबाद और भावनगर जिलों में भी सक्रिय
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये लोग नैतिक पुलिसिंग के नाम पर जोड़े को रोक कर उनकी पिटाई करते थे और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर डालते थे। वे महिला के माता-पिता को ब्लैकमेल करने के लिए बुलाते थे (ताकि महिला को रिश्ता खत्म करने के लिए मजबूर कर सकें)। ऐसे समूह आणंद, अहमदाबाद और भावनगर जिलों में भी सक्रिय थे।उन्होंने कहा कि आरोपियों द्वारा साझा किए गए वीडियो से भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या किए जाने और सांप्रदायिक झड़पों की आशंका बढ़ सकती है।
इससे पहले डीसीपी ने बताया था कि आरोपियों ने नैतिक पुलिसिंग के रूप में विशेष रूप से अपने ही धर्म की महिलाओं को निशाना बनाया और यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि क्या उन्होंने ऐसे वीडियो के आधार पर पैसे वसूले थे। उन्हें इस तरह के समूह को चलाने की प्रेरणा कहां से मिली, इसकी जांच की जा रही है।