ममता, नीतीश और केजरीवाल (फाइल फोटो)
झारखंड चुनाव नतीजों ने एक बार फिर गठबंधन सरकार की हकीकत और जरूरत पर मुहर लगा दी है। नतीजों से साफ हो गया है कि पूरे देश में एक पार्टी के शासन की अवधारणा महज कोरी कल्पना ही है। देश में कुल 28 राज्य हैं जिनमें से 13 राज्यों में इस समय क्षेत्रीय दलों के नेता ही मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं। ताजा सूची में झारखंड नया नाम है। हेमंत सोरेन 29 दिसंबर को सीएम पद की शपथ लेंगे।
13 राज्यों के सीएम
- बिहार - नीतीश कुमार, जदयू
- महाराष्ट्र- उद्धव ठाकरे, शिवसेना
- तमिलनाडु-पलानीस्वामी, अन्नाद्रमुक
- आंध्र प्रदेश- जगनमोहन रेड्डी, वाईएसआर कांग्रेस
- तेलंगाना- चंद्रशेखर राव, टीआरएस
- ओडिशा-नवीन पटनायक, बीजद
- झारखंड- हेमंत सोरेन, झामुमो (भावी सीएम)
- प. बंगाल- ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस
- दिल्ली- अरविंद केजरीवाल, आप
- मेघालय- कोनराड संगमा, नेशनल पीपल्स पार्टी
- मिजोरम- जोरामथांगा, एमएनएफ
- नगालैंड- नेफियो रियो, एनडीपीपी
- सिक्किम- प्रेम सिंह तमांग, एसकेएम
इससे साफ हो गया है कि देश में एक दल का शासन संभव ही नहीं। क्षेत्रीय दलों के बिना किसी राष्ट्रीय पार्टी के लिए राज्य में सरकार बनाना संभव नहीं दिखता। इस वक्त की सबसे मजबूत पार्टी भाजपा भी कई राज्यों में क्षेत्रीय दलों के भरोसे रही। इनसे साथ हुई खटपट या रणनीति में चूक ने उसे सत्ता से बाहर कर दिया।
महज दो साल के अंदर ही भाजपा को अपना करीब आधा राज गंवाना पड़ा है। दिसंबर 2017 तक वह देश के 71 फीसदी हिस्सों में शासन कर रही थी। हालांकि इसमें क्षेत्रीय दलों का भी बड़ा योगदान था। वहीं, अब दिसंबर 2019 में वह महज 35 फीसदी हिस्सों पर ही शासन कर रही है। एक साल के भीतर वह पांच राज्य गंवा चुकी है। पहले उसके हाथ से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ गया, फिर महाराष्ट्र गंवाया। अब झारखंड से भी बेदखल हो गई।
भाजपा ने एक साल में गंवाया पांचवां राज्य
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने महाराष्ट्र के बाद झारखंड की सत्ता भी गंवा दी है। हरियाणा में किसी प्रकार सत्ता बचाने में कामयाब रही भाजपा को बीते एक साल में 5 राज्यों (इससे पहले मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान) की सत्ता गंवानी पड़ी है। पार्टी राज्यों में हार का मिथक तोड़ने में कामयाब नहीं हो पा रही। वह भी तब जब पार्टी और मोदी सरकार एक के बाद एक राष्ट्रवादी एजेंडे को अमली जामा पहना रही है। जाहिर है कि झारखंड के निराशाजनक नतीजे के बाद भाजपा में चिंता है।