राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि लीबिया ले जाने के बाद उन्हें बिना किसी वेतन के निजी कंपनियों में नौकरी की पेशकश की गई और बंधुआ मजदूर के रूप में रखा गया।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, विदेश मंत्रालय और ट्यूनीशिया में भारतीय दूतावास के संयुक्त प्रयास से लीबिया में पिछले दो महीने से फंसे 12 भारतीय कामगारों को बचाया गया है। इन कामगारों को एक एजेंट द्वारा पंजाब से अवैध रूस से लीबिया ले जाया गया था। उन्हें आकर्षक नौकरी, अच्छे वेतन और खुशहान जीवन का वादा किया गया था।
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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) की ओर से जारी एक बयान में बताया गया है कि लीबिया ले जाने के बाद उन्हें बिना किसी वेतन के निजी कंपनियों में नौकरी की पेशकश की गई और बंधुआ मजदूर के रूप में रखा गया। कामगारों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें बेरहमी से पीटा गया और उचित भोजन भी नहीं दिया गया।
कुछ स्थानीय नेताओं के द्वारा एनसीएम के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा को पत्र लिखा गया है। पत्र में कामगारों को वापस लाने का अनुरोध किया गया था। ये कामगार अल्पसंख्यक समुदायों से हैं। लालपुरा ने छह फरवरी को विदेश मंत्रालय को प्रतिवेदन भेजा और कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया। ट्यूनीशिया में भारतीय दूतावास से भी इस संबंध में संपर्क किया गया।
दूतावास द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, लीबिया के बेनगाजी के एक निवासी ने फंसे हुए भारतीयों को मानवीय सहायता और राहत आपूर्ति प्रदान करने में मदद की। मंत्रालय और दूतावास की मदद से 12 में से चार भारतीयों को 12 फरवरी को लीबिया से सफलतापूर्वक वापस लाया गया। शेष आठ श्रमिकों को दो मार्च को वापस लाया गया था।