गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि राज्य के 1101 अस्पतालों के पास अब भी वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं हैं। ये प्रमाण पत्र गुजरात अग्नि सुरक्षा और जीवन रक्षा उपाय कानून के तहत जारी किए जाते हैं।
बता दें, गुजरात के राजकोट शहर के एक कोविड अस्पताल में आग और उसमें कई मरीजों की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद गुजरात सरकार से राज्य के अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा इंतजामों को लेकर नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। हाल ही में गुजरात सरकार ने इसे लेकर हलफनामा दायर किया है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट मामले में आगे सुनवाई कर सकती है। इस दौरान राज्य में कोविड-19 मरीजों के समुचित इलाज व मृतकों के शवों का गरिमामय ढंग से अंतिम संस्कार करने पर विचार हो सकता है।
गुजरात के शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त सचिव मुकेश पुरी ने हलफनामे में बताया है कि राज्य में अभी 5705 अस्पताल हैं। इनमें से 4604 के पास अग्नि शमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी है, लेकिन 1101 के पास नहीं है। यह एनओसी तब जारी की जाती है, जब आवेदक अस्पताल आग से बचाव के सारे इंतजाम करता है।
नियमों का पालन नहीं करने पर यह कार्रवाई की गई
गुजरात सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए हलफनामे में कहा गया है कि अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने वाले 1500 अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 30 अस्पतालों के पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं। 185 अस्पतालों को आंशिक रूप से सील किया गया है। यह कार्रवाई इसलिए की गई है, ताकि ये अस्पताल अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन करें। इन संस्थानों को नियमों का पालन करने के बाद ही फिर खोला जा सकेगा।
47 अस्पतालों में कोरोना का इलाज
हलफनामे के अनुसार वर्तमान में गुजरात के 47 अस्पतालों में ही कोविड-19 मरीजों का इलाज चल रहा है। इन सभी के पास अग्नि सुरक्षा का एनओसी है।