अपने माता-पिता और बहन के साथ इसाक पॉलालुंगमुआन
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मणिपुर में एक 11 वर्षीय लड़के ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से आवेदन किया है कि उसे 10वीं की परीक्षा देने की अनुमति मिले। वह 10वीं की परीक्षा देने वाला सबसे कम उम्र का छात्र बनना चाहता है। इसाक पॉलालुंगमुआन नामक यह लड़का अगले साल मार्च में होने वाली परीक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (बीओएसईएम) के नियम इस बात की इजाजत नहीं देते। नियमों के मुताबिक 10वीं की परीक्षा देने के लिए 15 साल की उम्र होना अनिवार्य है। चार बहन भाईयों में सबसे छोटा इसाक इस वक्त 9वीं कक्षा में पढ़ रहा है।
इससे पहले हैदराबाद की नैना जयसवाल ने 8 साल की उम्र में 10वीं की परीक्षा दी थी। इसाक का कहना है कि जब नैना 8 साल की उम्र में परीक्षा दे सकती है तो वह 11 साल की उम्र में क्यों नहीं दे सकता। इसाक का यह भी कहना है कि वह मणिपुर का सबसे कम उम्र का आईएएस अफसर बनना चाहता है। जिससे वह गरीब और जरूरतमंदो की मदद कर सके। इसाक के पिता गेनेखोलिअन वाईफेई (65) का कहना है कि उन्होंने अपने बेटे का सपना पूरा करने के लिए हाल ही में बीओएसईएम से संपर्क किया है, उन्हें इस संबंध में अब जवाब का इंतजार है।
बीओएसईएम सेक्रेटरी ए. जॉयकुमार सिंह का कहना है कि यह मणिपुर का ऐसा पहला मामला है। इसपर विस्तृत परामर्श की जरूरत है। क्योंकि वर्तमान नियम इसकी इजाजत नहीं देते हैं। इस बारे में अभी विचार विमर्श किया जाएगा और अन्य राज्यों के बोर्ड से भी संपर्क किया जाएगा। इसाक अपने माता-पिता द्वारा चलने वाले एमटी ऑलिव स्कूल में पढ़ता था और 8वीं कक्षा तक टॉप पोजिशन भी लाया है। इसाक की मां बोईजेम गंगते (38) का कहना है कि उनका बेटा बड़ी कक्षाओं की किताबें भी पढ़ता है और अन्य विषयों की भी।
इसाक के स्कूल की प्रिंसिपल का कहना है कि उसके पास असाधारण कौशल है। वह कक्षा में भी हर सवाल का जवाब देता है। इसी के चलते उसके माता-पिता ने स्कूल के सिलेबस में भी बदलाव (स्टेट बोर्ड टू सीबीएसई) किया है। ताकि पता चल सके कि इसाक के पास देशभर के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता है या नहीं। अब वह दूसरे स्कूल में दाखिला ले चुका है। टेस्ट में पास होने के बाद ही उसे दाखिला मिला है। अगर बोर्ड ने उसे परीक्षा देने की इजाजत दे दी तो वह मणिपुर में 10वीं की परीक्षा देने वाला सबसे कम उम्र का छात्र बन जाएगा।