गुजरात के गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में एसआईटी अदालत ने 11 दोषियों को मौत तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा 12 अन्य लोगों को सात साल के कारावास की सजा सुनाई गई है। लोक अभियोजक आरडी कोडेकर ने बताया कि फैसले के दौरान न्यायालय ने कहा कि 2002 की यह घटना सभ्य समाज के लिए एक काला दिन था।
गुलबर्ग मामले में करीब 15 साल बाद आए इस फैसले का कई लोगों ने स्वागत किया है लेकिन अन्य आरोपियों के कम सजा मिलने पर अपनी निराशा भी जताई है। समाजसेवी तीस्ता सीतलवाड़ ने कहा कि वह अदालत के इस फैसले से नाखुश हैं और जिन लोगों को कम सजा सुनाई गई है उसके खिलाफ वह अगली अदालत में अपील करेंगी। वहीं इस हमले में मारे गए एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी का कहना है कि सभी आरोपियों के आजीवन कारावास मिलनी चाहिए।
They brutally killd Ehsan Jafri, this is quantum of sentence?They should have all got life imprisonment: Zakia Jafri pic.twitter.com/QrvcBRnAEy
— ANI (@ANI_news) June 17, 2016
वहीं दोषियों के परिवार ने अदालत के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। वह एसआईटी कोर्ट के इस फैसले से नाखुश हैं। उनका कहना है कि उनके परिवार के सदस्य को गलत तरीके से इस मामले फंसाया गया है।
Relatives of convicts in Gulberg Case: We will appeal in higher courts. Our relatives are innocent. pic.twitter.com/YArOTprUxi
— ANI (@ANI_news) June 17, 2016