पिछले साल भारत-चीन बॉर्डर पर खासा तनाव बना रहा। पाकिस्तान और नेपाल सीमा से भी तनाव की खबरें आती रही। खास बात ये है कि जो भारतीय इलाका इन देशों की सीमाओं से लगता है, उसके सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कई तरह की योजनाएं क्रियान्वित की जाती हैं। पिछले छह साल के दौरान बांग्लादेश सीमा से लगते क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा राशि लगभग 5912 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
दूसरी तरफ भारत-भूटान, भारत-म्यांमार और भारत-चीन सीमा से लगते क्षेत्रों में उक्त अवधि के दौरान 2119 करोड़ रुपये से अधिक धन खर्च किया गया है। अगर घुसपैठ के मामलों पर गौर करें तो भारत-बांग्लादेश सीमा पर गत दो वर्ष के दौरान इनकी संख्या 1045 रही है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर ऐसे केसों की संख्या 63 है, जबकि भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर 61, भारत-भूटान बॉर्डर पर जीरो, भारत-म्यांमार और भारत-चीन बॉर्डर पर भी घुसपैठ के मामलों की संख्या जीरो है।
भारत-बांग्लादेश सीमा का एक बड़ा हिस्सा घनी आबादी के बीच से गुजरता है। बाकी हिस्से में कहीं पर नदियां हैं तो कहीं बड़े नाले बहते हैं। पहाड़ी इलाका भी है। घुसपैठ के अधिकांश मामले पश्चिम बंगाल से लगते सीमावर्ती इलाकों में देखने को मिलते हैं। यहां पर पशु तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी आम बात हो चली है। बीएसएफ का रोजाना ही ऐसे तस्करों से आमना-सामना होता है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब तस्करी या घुसपैठ का मामला सामने न आता हो।
गत रविवार को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कूच बिहार, 'पश्चिम बंगाल' जिले की सीमा चौकी पुतिया बरमसिया पर पशु तस्करों ने बीएसएफ जवानों पर गोली चला दी थी। बांग्लादेश की तरफ से 20-25 और भारत की ओर से 18-20 पशु तस्कर सीमा पर लगी तारबंदी के निकट पहुंच गए थे। बीएसएफ की पेट्रोलिंग पार्टी ने तस्करों पर मिर्ची ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। तस्करों ने बीएसएफ जवानों पर चार-पांच राउंड गोलियां चलाईं। बीएसएफ ने जब उन्हें जवाब देना शुरू किया तो सभी पशु तस्कर और अपराधी कोहरे का फायदा उठाकर भाग निकले।
बीएसएफ के मुताबिक, पिछले दो माह में यह दूसरी घटना है। ऐसी ही एक घटना 31 दिसंबर 2020 को हुई थी। बीएसएफ ने उस मामले में दो पशु तस्करों को गिरफ्तार कर लिया था। उसके बाद अपने साथियों को छुड़ाने के लिए तस्करों ने जवानों पर गोली चला दी थी। बीएसएफ अधिकारी के मुताबिक, यह हैरानी वाली बात है कि पशु तस्कर और अपराधी सीमा तक कैसे पहुंच जाते हैं। स्थानीय पुलिस उन्हें क्यों नहीं रोकती। सड़क पर पिकेट लगाकर ऐसे अपराधियों को बॉर्डर तक पहुंचने से पहले ही पकड़ा जा सकता है।
कई राज्यों से पशुओं को ट्रकों में भरकर पश्चिम बंगाल तक लाया जाता है। वहां से उन्हें बांग्लादेश सीमा में धकेला जाता है। बीएसएफ इन पशु तस्करों को पकड़ कर लोकल पुलिस के हवाले कर देती है। उनके कब्जे से मुक्त कराए गए पशुओं की देखभाल बीएसएफ को करनी पड़ती है। वजह, स्थानीय प्रशासन इस मामले का निपटारा करने में कई दिन लगा देता है। तब तक पशुओं को चारा खिलाने से लेकर उन्हें संभाल कर रखने की जिम्मेदारी बीएसएफ जवान ही पूरी करते हैं।
दूसरे बॉर्डर जैसे भारत-चीन, भारत-भूटान और भारत-म्यांमार सीमा से लगते अधिकांश इलाकों में आबादी उतनी नहीं है। चीन से लगती सीमा पर तो लोकल आबादी बहुत कम है। बाकी के दोनों देशों के साथ भी ऐसा ही है। हालांकि भारत-म्यांमार बॉर्डर जो लगभग 1643 किलोमीटर लंबा है, वह अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर और मिजोरम से सटा हुआ है। वहां तस्कर और उग्रवादी समूह हरकत करते रहते हैं।
भारत-भूटान बॉर्डर की लंबाई भी 699 किलोमीटर है। चीन से लगती सीमा की लंबाई 3488 किलोमीटर है, जबकि बांग्लादेश से लगती सीमा 4096 किलोमीटर लंबी है। यही वजह है कि सबसे ज्यादा पैसा बांग्लादेश सीमा से लगते इलाकों की सुरक्षा के लिए खर्च होता है। साल 2014 से लेकर अब तक बांग्लादेश सीमा से लगते क्षेत्रों में करीब 5912 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। भारत-भूटान सीमा के सीमावर्ती इलाकों पर करीब 115 करोड़ रुपये, भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 97 करोड़ और भारत-चीन सीमा पर करीब 1907 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।