उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के 100 शौचालयों को भगवा रंग में रंगने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ऐसा ग्राम प्रधान वेदपाल सिंह नायक के इशारों पर किया गया है। अपने बयान में ग्राम प्रधान नायक का कहना है कि गांव के लोगों ने ही मुझे इस रंग का सुझाव दिया था। जब भारतउनकी भाजपा सरकार ना केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि पूरे देश में बनी है तो ऐसे में शौचालयों को उनके रंग में रंगने में क्या परेशानी है।
यह घटना इटावा के अमृतपुर गांव की है जहां इस समय 350 शौचालय हैं जिसमें से 100 को भगवा रंग में रंग दिया गया है। लोगों का मानना है कि उनके इस कदम से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी खुश होंगे और क्षेत्र के विकास कार्यों में बढ़ोत्तरी होगी। ग्राम प्रधान का कहना है कि बाकी बचे हुए शौचालयों को भी बहुत जल्द दूसरों की तरह भगवा रंग में पेंट कर दिया जाएगा।इससे पहले 5 जनवरी को विधानसभा के पास बने हज राज्य समिति कार्यालय की दीवारों पर भी भगवा रंग कर दिया गया था। हालांकि भारी विरोध के बाद दीवारों पर फिर से सफेद रंग कर दिया गया था।
दीवारों को भगवा रंग में रंगने पर मौलानाओं ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि रंगो की राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसके पहले राज्य की कुछ बसें और सचिवालय की इमारतों को भगवा रंग से रंगा जा चुका है। जिसके बाद हज हाउस की बाहरी दीवारों का भी भगवाकरण कर दिया गया। हालांकि, ये 24 घंटे भी नहीं टिक पाया था।
राज्य हज कमेटी के सचिव आरपी सिंह ने कहा था कि हज हाउस को भगवा रंग से रंगे जाने को सियासत से न जोड़ा जाए। भवन साफ-सुथरा रहे इसलिए ऐसा किया गया है। मुख्य भवन का रंग पहले की तरह ही है। बाहरी दीवारों पर सफेद रंग से पुताई करवाने पर गंदी होने की ज्यादा आशंका थी। इसलिए इन दीवारों पर डार्क रंग से पुताई कराई गई है।