एनेस्थीसिया के 180 साल बाद अब आधुनिक तकनीकों, जीवनरक्षक दवाओं और निगरानी उपकरणों ने एनेस्थीसिया की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और सुरक्षित हो गई है। पहले मरीज को बेहोश करने के लिए दवाओं को सूंघाकर दिया जाता था और सर्जरी के लिए शरीर को पूरी तरह बेहोश किया जाता था। अब सर्जरी की जरूरत के अनुसार मरीज को पूरी तरह बेहोश करने के बजाय शरीर के किसी विशेष हिस्से को सुन्न करके भी ऑपरेशन किया जा सकता है। आधुनिक मशीनों और मॉनिटरिंग तकनीकों की मदद से ऑपरेशन के दौरान मरीज के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाती है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ यानी एनेस्थेटिस्ट की भूमिका केवल मरीज को बेहोश करने तक सीमित नहीं है।
एनेस्थीसिया के क्षेत्र में पिछले वर्षों में कई बदलाव आए हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा बेहतर हुई है। एनेस्थीसिया चिकित्सक ऑपरेशन से पहले, सर्जरी के दौरान और उसके बाद भी मरीज की देखभाल करते हैं। वे क्रिटिकल केयर यूनिट और बेसिक लाइफ सपोर्ट में भी टीम के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। -डॉ. अजय सूद, विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसिया, आईजीएमसी शिमला