हिमाचल प्रदेश में डीसी, एडीसी, एडीएम और एसडीएम का काम करने का तौर तरीका बदलेगा। 70 के दशक में अधिकारियों के कामकाज के लिए बने नियमों में सरकार बदलाव करने की तैयारी में है। अब नई तकनीक, चुनौतियों, बदलती जरूरत के हिसाब से जिला स्तर पर कार्यरत इन अफसरों के काम तय होंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देश पर कार्मिक विभाग ने नया जॉब मैनुअल बनाने का काम शुरू कर दिया है। देश के अन्य राज्यों के मॉडल को भी इसके लिए स्टडी किया जा रहा है। प्रस्ताव तैयार होने के बाद मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाएगा। सरकार प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक जवाबदेह और दक्ष बनाने की दिशा में यह बदलाव करने जा रही है। प्रशासन की रीढ़ माने जाने वाले उपायुक्त (डीसी), अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम), अतिरिक्त जिला उपायुक्त (एडीसी), उपमंडल अधिकारी नागरिक (एसडीएम) के कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों को अब नई तकनीक, बदलते समय और जमीनी जरूरतों के अनुरूप पूरी तरह से दोबारा परिभाषित करने का फैसला लिया गया है। पिछले कई दशकों में न केवल प्रशासनिक संरचना और जनसंख्या में परिवर्तन हुआ है, बल्कि तकनीकी विकास ने भी कामकाज की प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया है।
कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नए जॉब मैनुअल के मसौदे पर काम शुरू कर दिया गया है। इसमें डिजिटल प्रशासन, आपदा प्रबंधन, जन शिकायत निवारण प्रणाली, समयबद्ध सेवा और जन सहभागिता जैसे नए बिंदुओं को शामिल किया जाएगा।
जॉब मैनुअल में ये हो सकते हैं बदलाव
नए जॉब मैनुअल में तकनीक आधारित प्रशासनिक निर्णय प्रणाली लागू की जाएगी। कार्य समीक्षा के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम होगा। आपदा एवं संकट प्रबंधन में पूर्व-तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के लिए नियम बनेंगे। जन शिकायतों के समाधान की समयबद्ध प्रक्रिया तय होगी। ग्रामीण व शहरी जरूरतों के अनुसार काम का पुनर्गठन होगा।
एसीआर भी इसी आधार पर लिखी जाएगी
डीसी, एडीसी, एडीएम और एसडीएम की एसीआर भी नए जॉब मैनुअल के आधार पर लिखी जाएगी। काम करने के नए तरीकों पर जिला स्तर के फील्ड अधिकारी कितना खरे उतरे हैं, इसका मूल्यांकन किया जाएगा। उच्च अधिकारी इनकी वर्किंग को देखकर ही एसीआर लिखेंगे।