भुगतान के बाद लें शपथपत्र
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि संबंधित भू-मालिकों को मुआवजा वितरित किया जाए। इसके बाद उनसे यह शपथपत्र लिया जाए कि वे ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण कार्य में बाधा नहीं डालेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जमीन का निर्बाध उपयोग आगे के काम के लिए जरूरी है। मामले की अगली सुनवाई 14 सितंबर को होगी। एनएचएआई ने हाईकोर्ट को बताया कि दीर्घकालीन स्थिरीकरण के लिए निजी जमीन का शांतिपूर्ण और निर्बाध कब्जा जरूरी है। उपचारात्मक कार्य का ठेका एक कंपनी को दिया गया है। ढलान सुरक्षा और स्थिरीकरण का काम दो कंपनियों के माध्यम से कराया जाएगा।
जमीन कब्जे की प्रक्रिया शुरू होने से अब परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। एनएचएआई की योजना इसी साल धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करने की है। बॉक्स टनल बनने से थलौट के संवेदनशील हिस्से में यातायात को सुविधा मिलने के साथ बाजार क्षेत्र को बाईपास करने में मदद मिलेगी।-वरूण चारी, परियोजना निदेशक, एनएचएआई पीआईयू मंडी।