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UPSC Result: घंटों लगातार तैयारी, कड़ी मेहनत से पाया मुकाम; हिमाचल प्रदेश के युवाओं ने बताए सफलता के मंत्र

Sun, 08 Mar 2026 11:00 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर, चौपाल, नाहन, सिरमौर, चंबा, धर्मशाला।

सार

सफलता उन्हीं लोगों को मिलती है जो मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानते। सफलता हासिल करने के बाद युवाओं ने अपनी कामयाबी का रहस्य भी बताया। जानें विस्तार से
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विकास पंवर, सपना चंदेल, सुशांत चौहान, आदित्य धीमान, निधि चौधरी, प्रियंका चौधरी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के युवाओं ने यूपीएससी की परीक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सफलता हासिल करने के बाद युवाओं का कहना है कि कड़ी मेहनत के बल पर कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कामयाबी पाने के लिए वे घंटों तक लगातार पढ़ाई करते थे। कई पारिवारिक कार्यक्रमों को छोड़ना पड़ा। अब सफलता का फल मिला है।

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कुपवी के विकास ने रोजाना बारह घंटे की पढ़ाई, दिल्ली में ली कोचिंग
दूरदराज क्षेत्र कुपवी के 22 वर्षीय विकास पंवार ने कड़ी मेहनत से पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास की है। उन्होंने देशभर में 159वीं रैंक हासिल की। विकास का कहना है कि वे रोजाना 10 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे। बीते एक साल से वह यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए वह दिल्ली में ही कोचिंग भी ले रहे थे। 

विकास ने 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल न्यू शिमला से पूरी की। उसके बाद बीए ऑनर्स की पढ़ाई हिंदू महाविद्यालय दिल्ली से की। विकास वर्तमान में एमए राजनीति शास्त्र की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय से कर रहे हैं। विकास नीट की परीक्षा भी पास कर चुके हैं। विकास पंवार के पिता चतर पंवार पंचयात सचिव, टीजीटी आर्ट्स और आयकर निरीक्षक की परीक्षाएं पास कर इन पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। वर्तमान में वह दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य सेवाएं दे रहे हैं। विकास की माता विनिता पंवार गृहिणी हैं।  

विकास पंवार ने बताया कि यूपीएससी परीक्षा पास करना उनका सपना था, जिसकी प्रेरणा उन्हें पिता से मिली। अब वह अपने पिछड़े क्षेत्र के साथ देश के जरूरतमंद और आम जनमानस की सेवा करना चाहते हैं। 

आदित्य बोले, तैयारी के लिए पारिवारिक कार्यक्रम भी छोड़े
कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग के दम पर धर्मशाला के आदित्य धीमान ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा पहले ही प्रयास में उत्तीर्ण कर 753वीं रैंक हासिल की है। आदित्य ने बताया कि यूपीएससी की परीक्षा के लिए कोई विशेष कोचिंग नहीं ली। पढ़ाई के साथ-साथ ही इस परीक्षा की भी तैयारी की। इस दौरान वह घंटों तक कमरे में बंद रहकर लगातार पढ़ाई करते थे। भोपाल से एलएलबी ऑनर्स की पढ़ाई के साथ-साथ लगभग आठ से नौ घंटे पढ़ाई की। इस परीक्षा के लिए अपने पारिवारिक कार्यक्रमों को भी छोड़ दिया। कड़ी मेहनत और लग्न से परीक्षा को पास किया। उन्होंने बताया कि कोई ठान ले कि मैंने यह काम करना है, तो उसका लक्ष्य केवल वही होना चाहिए। इस परीक्षा के लिए सबसे ज्यादा प्रेरणा मेरे पिता से मिली है, क्योंकि वह भी प्रशासनिक सेवा में (एचएएस अधिकारी) रह चुके हैं। 

रचनात्मक गतिविधियों में भी रुचि
पढ़ाई के साथ-साथ आदित्य की रुचि रचनात्मक गतिविधियों में भी रही है। उन्हें गायन और पेंटिंग का काफी शौक है। उनके पिता भी प्रशासनिक सेवाओं में रह चुके हैं, जिनकी प्रेरणा और मार्गदर्शन से आदित्य ने सफलता हासिल की। परिजनों का कहना है कि आदित्य पढ़ाई में मेधावी रहे हैं

टीना डाबी से मिली प्रेरणा और कड़ी मेहनत से साकार किया सपना
सिरमौर के नाहन विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्र देवका पुड़ला निवासी 23 वर्षीय सुशांत चौहान ने यूपीएससी परीक्षा में  659वीं रैंक हासिल की है। सुशांत ने बताया कि वह जब नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तब आईएएस टीना डाबी ने अपने पहले प्रयास में ही यूपीएससी की परीक्षा में पहला रैंक प्राप्त किया था। उन्हें इससे प्रेरणा मिली। यही वह पल था जब उन्होंने ठान लिया कि उन्हें भी यूपीएससी की परीक्षा पास कर बड़ा अधिकारी बनना है। 

उन्होंने बताया कि इस परीक्षा को पास करने में उनकी माता ममता देवी, पिता भूपेंद्र सिंह चौहान व एसवीएन स्कूल के प्रधानाचार्य कुंदन ठाकुर सहित शिक्षकों का भी योगदान है। उन्होंने कहा कि दसवीं कक्षा में मेरिट सूची में वह मात्र एक अंक से रह गए थे। इसके बाद कई दिन तक मन उदास रहा। लेकिन सभी के सहयोग से मेहनत फिर शुरू की। उनके पिता शिक्षा विभाग में अधीक्षक के पद पर तैनात पिता भूपेंद्र सिंह चौहान व माता ममता देवी ने भी अपने बेटे के लक्ष्य को पूरा करने में हर संभव साथ दिया। 

उनके माता-पिता ने बताया कि उन्हें गर्व है कि आज उनके बेटे ने इस कठिन परीक्षा को पास किया है। एसवीएन स्कूल के प्रधानाचार्य कुंदन ठाकुर ने बताया कि सुशांत ने यूपीएससी परीक्षा पास कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 

बोले, परीक्षा त्याग मांगती है
सुशांत ने कहा कि युवा एक लक्ष्य तय कर नियमित पढ़ाई करें तो सफलता जरूर मिलेगी। कोई भी प्रतियोगी परीक्षा त्याग मांगती है। इसके लिए कई बार घर के ही कार्यक्रम छोड़ने पड़ते हैं। पढ़ाई फोक्स होकर करें और बुरी आदतों से खुद को दूर रखें। इतना ही नहीं अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए भी नियमित मेहनत करें। छुपी हुई प्रतिभा को खोजने की भी कोशिश करें। इंटरव्यू राउंड में यही व्यक्तित्व काम आता है। 

बिलासपुर की सपना बोलीं, कड़ी मेहनत सकारात्मक सोच से हासिल की सफलता
ग्राम पंचायत बल्ह बुलाणा के तलवाड़ गांव की बेटी सपना चंदेल ने केंद्रीय लोक सेवा आयोग सिविल सेवा परीक्षा में 356वीं रैंक प्राप्त की। सपना के पिता रविंद्र चंदेल भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। पिता की सेना में सेवा के कारण सपना की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली में हुई। उन्होंने गणित विषय में एमएससी. की पढ़ाई पूरी की। सपना ने बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने शुरुआत में दिल्ली के कोचिंग संस्थान से मार्गदर्शन लिया। इसके बाद उन्होंने स्वयं अध्ययन के माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी। इस बार मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने समाजशास्त्र विषय चुना। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, सकारात्मक सोच और परिवार के सहयोग को दिया। सपना का कहना है कि अगर युवा पूरी लगन और ईमानदारी से अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करें तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। उन्होंने युवाओं को सकारात्मक सोच और लक्ष्य के प्रति समर्पण अपनाने की सलाह भी दी। 

वर्ष 2024 में पास कर चुकी हैं आईएफएस की परीक्षा 
सपना इससे पहले वर्ष 2024 में इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) की परीक्षा पास कर चुकी हैं। बेहतर तैयारी के लिए उन्होंने एक वर्ष का एक्सटेंशन लिया और इस वर्ष की परीक्षा में 356 वीं रैंक हासिल कर परिवार और जिले का नाम रोशन किया। सपना की इस उपलब्धि से गांव और आसपास के क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों ने परिवार को बधाइयां दी और कहा कि यह उपलब्धि अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। 
 

त्रिलोकपुर पंचायत की निधि की यूपीएससी में 466वीं रैंक
नाहन विकास खंड की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर की निधि चौधरी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में देशभर में 466वीं रैंक पाई है। 
निधि चौधरी के पिता धनीराम चौधरी दिल्ली में भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस में सहायक कमांडेंट के पद पर तैनात हैं। उनकी माता जसविंद्र कौर गृहिणी हैं। निधि के पिता धनीराम चौधरी ने बताया कि उनकी बेटी ने वर्ष 2024 में यूपीएससी परीक्षा में 691वीं रैंक हासिल की थी। उसका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में हुआ और वह हैदराबाद स्थित आईपीएस अकादमी में प्रशिक्षण ले रहीं। उन्होंने बताया कि निधि का बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना था। अपने इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने आईपीएस प्रशिक्षण से एक वर्ष का अवकाश लेकर यूपीएससी की परीक्षा दोबारा देने का फैसला किया। निधि ने बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी ऑनर्स की पढ़ाई की है।
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डीसी चंबा की पत्नी प्रियंका ने पास की यूपीएससी की परीक्षा
उपायुक्त मुकेश रेपसवाल की धर्मपत्नी प्रियंका चौधरी ने यूपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की है। परीक्षा में उनकी 79वीं रैंक आई है। यह उनका तीसरा प्रयास रहा। इस उपलब्धि पर पूरे परिवार में खुशी की लहर है। उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि कड़ी मेहनत और लग्न से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। प्रियंका चौधरी पुत्री शंकर लाल सारण एक व्यवसायी हैं। उनकी माता सोहिनी चौधरी कुशल गृहिणी हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से जियो-फिजिकल टेक्नोलॉजी में एमटेक किया है। वह बीकानेर राजस्थान की रहने वाली हैं। उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने बताया कि 2020 में वह एडीसी चंबा के रूप में तैनात थे, तब उनकी शादी हुई थी। उन्होंने अपने बेहतरीन प्रर्दशन के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। 
 
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