इससे पहले एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों पर लगातार फीस का बोझ बढ़ा रहा है और विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान एसएफआई ने प्रो वाइस चांसलर का पद समाप्त करने सहित छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर कार्यकारिणी परिषद् से निर्णय लेने की मांग उठाई। एसएफआई ने कहा कि 19 मई को सौंपे गए पांच ज्ञापनों में उठाए गए सभी विषयों पर परिषद कार्रवाई करे। संगठन ने नियुक्तियों, यूजीसी सीएएस पदोन्नतियों और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, छात्र केंद्रीय संघ चुनाव बहाल करने, डे-स्कॉलर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त बसें चलाने, नए छात्रावासों के निर्माण, भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा, विभागाध्यक्षों की नियुक्तियों में पारदर्शिता, नव निर्मित शैक्षणिक भवन की लागत की जांच और सार्वजनिक धन के विवेकपूर्ण उपयोग सहित 17 मांगें रखीं।
परिषद की बैठक से पहले शनिवार सुबह 10:30 बजे गैर शिक्षक कर्मचारियों ने परिसर में रैली निकालकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में कार्यकारी परिषद सदस्य सुरेश भी शामिल रहे। कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में लंबे समय से रिक्त पड़े गैर शिक्षक पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं और मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने परिषद से बैठक में इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लेने की मांग की।