हिमाचल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि चिन्हित ट्रेडों जैसे राजगीर, बढ़ईगिरी, वेल्डिंग, पलंबर, पेंटर, ब्लैकस्मिथ इत्यादि में भी अब प्रदेश के अशिक्षित बेरोजगार युवा महत्वाकांक्षी कौशल विकास भत्ता योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे, जिससे वे अपनी दक्षता का उन्नयन कर सकें।
मुख्यमंत्री गुरूवार देर शाम को यहां कौशल विकास भत्ता योजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
मंत्रिमंडल ने पहले ही इस योजना के अंतर्गत पात्र युवाओं की आयु सीमा को 18 वर्ष से घटाकर 16 करने तथा आवश्यक शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास करने को स्वीकृति प्रदान की है।
विभाग लघु क्षेत्र के लिए उचित औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने के लिए आवश्यक पग उठाएगा तथा केंद्र सरकार की एमईएस योजना की तर्ज पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगा।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि इससे न केवल अधिक से अधिक पात्र युवाओं को इस महत्वाकांक्षी योजना के दायरे में लाया जा सकेगा, बल्कि योजना का दायरा भी बढ़ेगा।
इसके अतिरिक्त इन पारंपरिक व्यवसायों में उच्च दक्षता की श्रम शक्ति सुनिश्चित बनाने में सहायता भी मिलेगी। इससे न केवल राज्य एवं देश में युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर सुनिश्चित होंगे, बल्कि मध्य पूर्वी एवं अरब देशों में भी होंगे, जहां इन दक्ष कारीगरों की काफी मांग है। उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि सभी पाठ्यक्रम प्रमाणित होंगे, जिससे प्रशिक्षित युवा अपनी विशेषज्ञता के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत कर सकें। इससे पारंपरिक दस्तकारी के सरंक्षण एवं उन्हें पुनर्जीवित करने में भी सहायता मिलेगी।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि कौशल विकास भत्ता योजना के दायरे में अभी तक 20 हजार से अधिक लाभार्थी लाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष के अंत तक लाभार्थियों की संख्या 30 हजार से अधिक होने की संभावना है। उन्होंने श्रम एवं रोजगार विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस योजना में अधिक संख्या में पात्र युवाओं को शामिल करें।