अंब (ऊना)। चौआर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास कन्हैया जोशी ने कलियुग के कुप्रभावों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को भगवान से सांसारिक सुख नहीं, बल्कि स्वयं भगवान को प्राप्त करने की कामना करनी चाहिए, क्योंकि सांसारिक सुख क्षणिक होते हैं और व्यक्ति को कर्मबंधन में बांधते हैं। वहीं, भगवान की प्राप्ति से मनुष्य परमानंद को प्राप्त कर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि वह कर्म ही सच्चा धर्म है, जिसे करके भगवान की प्राप्ति हो सके। कथा के दौरान उन्होंने महाभारत के विविध प्रसंगों के साथ-साथ कलयुग के कुप्रभावों और राजा परीक्षित को ऋषि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव मुनि द्वारा सुनाई गई श्रीमद्भागवत कथा के गूढ़ रहस्यों का वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।