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Una News: ऊना नगर निगम बनने से शहर के साथ लगती 14 पंचायतें होंगी मर्ज

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सभी पंचायतों ने सशर्त अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र ब्लॉक कार्यालय ऊना में करवाए थे जमा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। प्रदेश की सुक्खू सरकार ने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के गृह जिले को नगर निगम और नगर पंचायत का दर्जा दिया है। इससे आने वाले दिनों में जहां विकास की गति तेज होगी और लोगों की सुविधाओं में भी इजाफा होगा। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में नगर परिषद ऊना को नगर निगम बनाने को लेकर मंजूरी मिलने से शहर के साथ लगती 14 पंचायतों को इसमें शामिल किया जाएगा। नगर परिषद ऊना में आसपास की 14 पंचायतों को मर्ज कर नगर निगम बनाया जाएगा। इसे लेकर प्रदेश सरकार ने शनिवार को मंजूरी प्रदान कर दी है। संबंधित सभी 14 ग्राम पंचायतों ने सशर्त अपने अनापत्ति प्रमाण पत्र ब्लॉक कार्यालय ऊना में जमा करवा दिए थे। इसके बाद ही जिला प्रशासन की तरफ से प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए सरकार को भेज दिया था। प्रदेश में वर्तमान में शिमला, धर्मशाला, मंडी, सोलन व पालमपुर में पांच नगर निगम हैं। जबकि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सत्ता में आते ही हमीरपुर, ऊना और बद्दी में भी नगर निगम बनाने की घोषणा की थी।

नगर निगम के लिए आवश्यक 40 हजार की आबादी की शर्त को पूरा करने के लिए नगर परिषद ऊना के साथ आसपास की 14 पंचायतों को शामिल किया गया। नगर निगम में रायंसरी, झलेड़ा, लालसिंगी, रामपुर, कुठार कलां, कुठार खुर्द, अरनियाला लोअर, अरनियाला अप्पर, कोटला कलां लोअर, कोटला कलां अप्पर, अजनोली, कोटला खुर्द, मलाहत व जलग्रां टब्बा ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। वहीं नगर निगम में शामिल होने के लिए विभिन्न पंचायतों ने इसके साथ ही कई शर्तें भी रखी हैं। नगर निगम में समाहित होने के लिए ग्राम पंचायतों ने सशर्त सहमति दी है। सरकार की तरफ से पंचायतों की किन शर्तों को माना जाता है, इस पर आगामी दिनों में तस्वीर साफ होगी।
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14 ग्राम पंचायतों ने सशर्त दी है मंजूरी
नगर निगम में शामिल होने के लिए 14 ग्राम पंचायतों ने सशर्त एनओसी प्रदान की है। इन शर्तों में पंचायत क्षेत्रों में नगर निगम के टैक्स में छूट देने, वर्तमान में चल रहे पंचायत के कार्यकाल को पूरा करने, टीसीपी से संबंधित राहत प्रदान करने की शर्तें रखी गई हैं। इसके अलावा ग्रामीणों में अभी इसे लेकर यह संशय भी बना हुआ है कि नगर निगम बनने के बाद पंचायतों में मनरेगा के तहत रोजी रोटी कमाने को मुश्किलों के सामना करना पड़ सकता है। इन मामलों पर अभी किसी पंचायत ने कोई विरोध नहीं जताया है। इसके साथ ही पंचायतों में कूड़ा कचरे की समस्या भी खत्म होगी। इससे लोगों को काफी राहत मिलेगी।
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