मैहतपुर-ऊना मुख्य मार्ग पर देहलां के पास किसी मेडिकल स्टोर संचालक ने एक्सपायर दवाओं की खेप खुले में फेंक दी। हाईवे से गुजर रहे स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दी, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत टीम का गठन कर उन्हें मौके पर भेजा, लेकिन पुख्ता सूत्रों के मुताबिक कार्रवाई की भनक लगते ही उक्त विक्रेता ने टीम के पहुंचने से ही पहले ही फेंकी गई दवाइयों को नाले से उठा लिया।
उधर, प्रशासन ने आनन-फानन में रिपोर्ट तैयार कर दी कि मौके पर दवाइयों से संबंधित सामग्री तो मिली है, लेकिन किसी प्रकार की दवाई आदि बरामद नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक प्रशासन ने इस मामले में कार्रवाई के बजाय कथित तौर पर लीपा-पोती कर दी। इससे जांच होने से पहले ही मामला ठंडा हो गया। कानूनन किसी भी प्रकार का मेडिकल वेस्ट या दवाई खुले में फेंकना अपराध की श्रेणी में है और इसके लिए सजा का प्रावधान भी है। स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर ऐसी कार्यशालाओं में लोगों को जागरूक करने के लिए हजारों रुपये व्यय करता है, लेकिन इस मामले में समुचित कार्रवाई न करना सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक बुधवार को देहलां स्थित गुरुद्वारा के पास पुली पर एक कार रुकी जिसमें से एक्सपायर दवाओं के भरे कार्टन एक-एक कर फेंके गए। बताया जा रहा है कि एक्सपायर हो चुकी ये दवाइयों की शीशियां खांसी के इलाज से संबंधित थी। एक्सपायर दवाओं को खुले में न फेंक कर उन्हें वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करने का प्रावधान है, लेकिन मेडिकल विक्रेता ने इसे पुली से नीचे नाले में खुले में फेंक दिया।
उधर, लोगों ने जैसे ही इसकी सूचना सीएमओ को दी तो मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से कार्रवाई के लिए डॉ. प्रवीण कुमार, बीएमओ हरोली डॉ. संजय मनकोटिया, एमओ पीएचसी देहलां डॉ. सुरेश कुमार की एक टीम मौके पर भेजा। इसके अलावा डीएसपी हेडक्वार्टर कुलविंद्र सिंह ने भी घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि पुलिस अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है।
कब्जे में लिए गए दवा के खाली कार्टन : सीएमओ
सीएमओ डॉ. प्रकाश दड़ोच ने कहा कि सूचना मिलते ही तुरंत तीन डॉक्टरों की एक टीम का गठन कर उन्हें मौके पर भेजा गया। खुले में मेडिकल वेस्ट या दवाएं फेंकना कानूनन अपराध है, लेकिन मौके पर से दवाओं के खाली कार्टन बरामद हुए, जिन्हें विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है।