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Una News: मक्की की अगेती फसल में खरपतवार बने किसानों के लिए मुसीबत

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बारिश के बाद खरपतवारों ने तेजी से की वृद्धि, दवाइयों का छिड़काव बेअसर
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किसानों ने कहा- फसल की वृद्धि को प्रभावित करते हैं खरपतवार


संवाद न्यूज एजेंसी



ऊना। जिला में अगेती मक्की की फसल में खरपतवार उगना शुरू हो गए हैं। इससे फसल की वृद्धि पर असर पड़ने लगा है। किसानों के लिए खरपतवार निकालना बेहद मुश्किल हो चुका है। किसानों ने खरपतवार हटाने के लिए जरूरी दवाओं का छिड़काव करना शुरू कर दिया है। इस छिड़काव से फसल पर भी असर हो रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले के सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में करीब 500 हेक्टेयर जमीन पर मक्की की अगेती फसल उगाई गई है। यह फसल अप्रैल के अंतिम और मई माह के शुरुआती दिनों में उगाई गई। फसल का पौधा करीब दो से तीन फीट तक तैयार हो चुका है लेकिन बीते दिनों में अच्छी बारिश के बाद फसल के साथ खरपतवारों ने भी तेजी से वृद्धि की। स्थिति यह हो चुकी है कि अगर फसल में खाद का छिड़काव भी किया जा रहा तो फसल से अधिक असर खरपतवारों पर हो रहा। किसानों का कहना है कि मक्की की गुड़ाई करना एकमात्र विकल्प है लेकिन इसमें एक दिन की 500 से 600 रुपये की मजदूरी देनी पड़ती है। कहा कि खरपतवार नाशक दवाइयों की कीमत भी बेहद अधिक है। उनके छिड़काव से भी घास शत प्रतिशत नष्ट नहीं हो रहे। दोबारा बारिश होने पर फिर खरपतवार उग रहे हैं।
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अगले माह होगी कटाई
मक्की की अगेती फसल की कटाई जुलाई में होगी। फसल को पंजाब की मंडियों में बेचा जाता है। अगेती मक्की की पोल्ट्री उद्योग में काफी मांग रहती हैं। इसे 2000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास कीमत मिलती है। इस फसल के बाद किसान दो माह वाली आलू की फसल तैयार करते हैं।
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उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉॅ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि मक्की की अगेती फसल अच्छे से तैयार हो रही है। कहा कि किसानों को खरपतवार को लेकर अगर कोई समस्या पेश आ रही तो कृषि विभाग से सहयोग ले सकते हैं।
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