किसानों ने गेहूं और आलू की फसल को बीमारी से बचाने के लिए उठाए कदम
बीते दिनों लगातार मौसम खराब रहने से फसलों को बीमारी लगने का हो गया है खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में कुछ दिन मौसम खराब रहने के बाद बुधवार को अच्छी धूप खिली। लगातार खराब चल रहे मौसम के बीच किसानों को फसलों की चिंता सता रही थी। मौसम साफ होने पर अब खेतों में कीटनाशकों और खाद के छिड़काव के कार्य ने जोर पकड़ लिया है। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं पर पीलिया बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। एहतियातन दवाओं का छिड़काव करना जरूरी है। जिले में करीब 35000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल तैयार हो रही है। बीते दिनों अच्छी बारिश होने से खेतों में पर्याप्त नमी है लेकिन लगातार खराब मौसम के बीच फसलों को बीमारी का खतरा बढ़ गया। बारिश और हवाओं के कारण कई स्थानों पर गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। गिरी फसल को कुछ हद कर दोबारा बेहतर करने के लिए मौसम का साफ होना और धूप खिलने की जरूरत थी। बुधवार को आवश्यकता के अनुसार मौसम होने पर किसानों ने राहत की सांस ली। किसान विनोद कुमार, तरसेम लाल, बलदेव सिंह, सुरेंद्र राणा ने बताया कि गेहूं की फसल पर पीलिया बीमारी का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में जरूरी दवाओं का छिड़काव किया गया है। वहीं, आलू की फसल के लिए खाद व अन्य कीटनाशक स्प्रे किए जा रहे हैं।
अगले माह शुरू होगी फसल की कटाई
जिले में अप्रैल से गेहूं की कटाई का दौर शुरू हो जाएगा। उसी समय आलू निकालने का काम शुरू होगा। इस सीजन के कार्य निपटाने में प्रवासी मजदूरों की अहम भूमिका रहती है। किसान, मजदूरों की मदद से ही अपने कार्य समय पर निपटाने में सफल हो पाते हैं। हालांकि, गेहूं कटाई के लिए लगातार बढ़ती मजदूरी को लेकर बीते वर्ष विवाद भी हुआ और किसानों ने मजदूरों का बहिष्कार भी किया था।
उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण ने बताया कि गेहूं की फसल अच्छे तरीके से तैयार हो रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर फसल गिरने से प्रभावित हुई है लेकिन बारिश से सिंचित के साथ गैर सिंचित इलाकों में भी फसल की स्थिति बेहतर हुई है। बारिश के बाद उचित समय पर मौसम साफ हुआ है। फसलों से जुड़ी किसी सुविधा को लेकर किसान विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।