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Una News: मौसम की मार, देसी आम की फसल बर्बाद, अचार उद्योग पर भी असर

Sun, 12 Apr 2026 01:35 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। जिला में लगातार बदल रहे मौसम ने इस बार देसी आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। बेमौसमी बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के चलते अधिकतर आम के पेड़ों से बोर (मंजर) झड़ गया है, जिससे फसल लगभग बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। बागवानों के अनुसार अब पेड़ों पर न के बराबर बोर बचे हैं जिससे इस सीजन में उत्पादन में भारी गिरावट तय मानी जा रही है।
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जिला ऊना देसी आम के उत्पादन के लिए जाना जाता है और यहां से हर साल बड़ी मात्रा में कच्चे आम की सप्लाई पंजाब के विभिन्न इलाकों में होती है लेकिन इस बार मौसम की मार के चलते सप्लाई पर भी असर पड़ना तय है। बागवानों का कहना है कि फरवरी-मार्च और अब अप्रैल में आए मौसम के उतार-चढ़ाव ने बोर को पूरी तरह प्रभावित किया, जिससे फल बनने की प्रक्रिया बाधित हो गई। अचार उद्योगों में भी ऊना के कच्चे आम की खास मांग रहती है। यहां के देसी आम से बने अचार की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है, जिसके चलते पंजाब सहित अन्य राज्यों के कारोबारी यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा आम खरीदते हैं। हालांकि इस बार उत्पादन कम होने से अचार उद्योगों को भी कच्चे माल की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। जिले में अधिकांश पेड़ देसी किस्म के हैं और यहां हर साल करीब 12000 मीट्रिक टन तक कच्चे आम का उत्पादन होता है। बीते वर्ष भी तेज हवाओं और बारिश के कारण उत्पादन घटकर करीब 10000 मीट्रिक टन रह गया था। इस बार उत्पादन में और गिरावट आना निश्चित है। आमतौर पर कच्चे आम के दाम पांच से लेकर 30 रुपये प्रति किलो तक मिलते हैं। उपनिदेशक जिला बागवानी विभाग डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि खराब मौसम और ओलावृष्टि से फलदार पौधों पर बुरा असर पड़ा है। बागवानों को फसल बचाव को लेकर जहां भी मार्गदर्शन की आवश्यकता है, विभाग से संपर्क करें। नुकसान को लेकर विभाग जल्द सर्वेक्षण भी करवाएगा।


क्या कहते हैं बागवान
बागवानों में रविंद्र पाल, राकेश कुमार, अजयपाल, सुखविंद्र सिंह, राजकुमार सहित अन्य ने कहा कि आम की फसल के लिए बारिश लाभदायक मानी जाती है। इससे फलों की वृद्धि तेज होती है लेकिन बारिश के साथ चलने वाली तेज हवाएं नुकसानदायक साबित होती हैं। पिछले दिनों तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण पेड़ों से बोर झड़ गया। ध्यान रहे कि अप्रैल माह में आम के पेड़ फूलों से लदे नजर आए जिससे बंपर उत्पादन की उम्मीद और मजबूत हुई। इस बीच खराब मौसम से वर्तमान हालात बिल्कुल विपरीत नजर आ रहे।
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