खेतों में पैदा हो चुकी थी जलभराव की स्थिति
किसान पानी की निकासी और खरपतवार हटाने में जुटेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में रविवार से मंगलवार तक खराब रहे मौसम के बाद बुधवार सुबह खिली धूप ने किसानों को बड़ी राहत दी। विशेष रूप से आलू की फसल तैयार कर रहे किसानों के चेहरों पर रौनक लौट आई। आलू की फसल पर खतरा टल गया है। जिन खेतों में जलभराव हुआ था, वहां किसानों ने पानी की निकासी शुरू कर दी है। साथ ही अब खेतों से खरपतवार हटाने का कार्य भी आरंभ किया जाएगा। हालांकि मौसम विभाग ने बुधवार को भी बारिश की संभावना जताई थी, लेकिन सुबह से ही धूप निकलने से राहत रही। इसके बाद दिनभर कभी धूप तो कभी बादलों की आंख-मिचौनी जारी रही।
जानकारी के अनुसार लाल सिगीं, पंडोगा, गगरेट और अंब क्षेत्र के कई हिस्सों में बारिश से आलू की क्यारियों में पानी भर गया था। मंगलवार को हुई बारिश के बाद किसानों को फसल सड़ने का डर सताने लगा था। ऐसे में बुधवार को साफ मौसम किसानों की उम्मीदों के अनुरूप रहा। किसानों राजीव कुमार, विजय कुमार, सुरेश सैनी, अमरीक सिंह और सुखविंद्र सिंह ने बताया कि आलू की फसल के लिए सीमित मात्रा में बारिश लाभदायक रही है। इससे क्यारियों की मिट्टी की पकड़ मजबूत हुई है। पहले ट्यूबवेल से सिंचाई करने पर मिट्टी ढीली होकर नीचे गिर रही थी। किसानों ने उम्मीद जताई कि आने वाले सप्ताह में अगर मौसम सामान्य रहा तो फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि रविवार से लगातार तीन दिन हुई बारिश ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया था। अगर बुधवार को भी बारिश जारी रहती तो बीज सड़ने का खतरा बढ़ जाता।
फसलों पर मौसम की मार जारी
जिले में फसलों पर मौसम की मार लगातार जारी है। भारी बरसात के चलते पहले मक्की की फसल को भारी नुकसान हुआ। इसके बाद आलू की दो माह वाली फसल की बिजाई में 15 से 20 दिन की देरी हुई। वहीं, अक्तूबर के शुरुआती दिनों में तीन दिन लगातार हुई बारिश ने एक बार फिर किसानों की चिंता बढ़ा दी।
कृषि विभाग ने दी सलाह
कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि बुधवार को मौसम साफ रहने से फिलहाल फसलों पर खतरा टल गया है। अभी अधिकांश खेतों में जलभराव की स्थिति नहीं है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि यदि कहीं फसल संबंधी समस्या उत्पन्न हो रही हो तो तुरंत विभाग को सूचित करें, ताकि आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाई जा सके।