नारी (ऊना)। प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच ऊना जिले के नारी की रीना ने नहाने के लिए हर्बल साबुन बनाकर न केवल आर्थिक तंगी को धोकर स्वरोजगार की राह बनाई है बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
उनके बनाए साबुन की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है और इससे वह हर महीने करीब 20 हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं। रीना ने बताया कि हर्बल साबुन बनाने के लिए ग्लिसरीन, बकरी का दूध और एलोवेरा से सोप बेस तैयार किया जाता है।
इसमें नीम, बणा और तुलसी की पत्तियों का पाउडर मिलाया जाता है, जबकि खुशबू के लिए नारियल या अन्य प्राकृतिक तेल का उपयोग किया जाता है।
दाग-धब्बों के लिए मुल्तानी मिट्टी और गुलाब की पंखुड़ियों का पाउडर भी मिलाया जाता है। मिश्रण को सांचे में डालकर चार घंटे तक जमाने के बाद पैक किया जाता है। एक किलोग्राम मिश्रण से 100 ग्राम की 10 साबुन टिक्कियां तैयार होती हैं।
एक टिक्की बनाने में 20 से 25 रुपये की लागत आती है, जबकि यह करीब 40 रुपये में बिकती है। पांच टिक्कियों का पैकेट 150 से 200 रुपये में बेचा जाता है।
रीना ने बताया कि साबुन निर्माण में तीन से चार अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है, जिन्हें 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाती है। कच्चा माल बाजार से और कई जड़ी-बूटियां आसपास के जंगलों से मिल जाती हैं। मेहनत और गुणवत्ता के दम पर इस काम को अच्छा मुनाफे वाला बनाया जा सकता है।
उनका मानना है कि महिलाएं घर से ऐसे छोटे-छोटे उद्योग शुरू कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं। कई लोग घर से ही साबुन को खरीद रहे हैं, जबकि स्थानीय दुकानदार भी बड़ी मात्रा में साबुन की खरीद रहे हैं। सामग्री इकट्ठी करना और साबुन बनाना मेहनत का कार्य है लेकिन जितनी मेहनत करेंगे उतनी ही आमदनी बढ़ जाएगी।
रीना द्वारा तैयार किया गया हर्बल साबुन । संवाद