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Una News: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज मुखर

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कहा, सवर्ण समाज को अपना स्थायी वोट बैंक समझने की भूल न करें
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संवाद न्यूज एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए गए उच्च शिक्षा में समता विनियम, 2026 को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। सवर्ण समाज के लोगों में इन नियमों को लेकर गहरा रोष है और वे मोदी सरकार से स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार सवर्ण समाज को अपना स्थायी वोट बैंक समझने की भूल न करे। विरोध करने वालों का आरोप है कि नए नियमों में सवर्ण समाज को अप्रत्यक्ष रूप से अपराधी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनका मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अराजकता और जातिगत विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि राजनीतिक दलों के नेता इस गंभीर मुद्दे पर चुप क्यों हैं।
हिमाचल प्रदेश शिवसेना (शिंदे) के कार्यकारी अध्यक्ष जयदत्ता ने कहा कि इन नियमों के तहत सवर्ण छात्रों के खिलाफ शिकायतों की आशंका बढ़ेगी और सुनवाई समितियों में सवर्ण समाज का प्रतिनिधित्व नहीं है।
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वशिष्ठ ज्योतिष सदन के अध्यक्ष शशिपाल डोगरा ने इसे विभाजनकारी नीति बताते हुए कहा कि ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज इन नियमों को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देंगे।
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भाजपा के पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड ने आशंका जताई कि झूठी शिकायतों से सवर्ण छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

विद्युत पेंशनर फोरम ऊना के महासचिव पंडित शांति स्वरूप शर्मा ने सरकार को मंडल राजनीति के दुष्परिणामों की याद दिलाई। ब्राह्मण सभा की वरिष्ठ सदस्य पंडित शक्ति शर्मा ने कहा कि इन नियमों से सवर्ण समाज के युवा सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। सवर्ण समाज ने इन नियमों को अन्यायपूर्ण बताते हुए एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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