पुराना भवन गिरने के बाद बिगड़ी व्यवस्था, रात्रिकालीन सेवाएं ठप होने से दूसरे अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग
स्टाफ की कमी से नहीं मिल रही रात में स्वास्थ्य सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आयुर्वेदिक अस्पताल ईसपुर में रात्रिकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बंद होने से आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। अस्पताल का पुराना भवन गिराए जाने के बाद यहां की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले अस्पताल में पर्याप्त कमरे और अपनी एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन अब रात के समय उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मरीजों को दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों का रुख करना पड़ता है।
ईसपुर, पंडोगा, खड्ड, दौलतपुर, ढक्की, पंजावर, नगनोली और गुगलैहड़ सहित आसपास के गांवों के लोग स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इस अस्पताल पर निर्भर हैं। रात में किसी मरीज की तबीयत बिगड़ने या आपात स्थिति पैदा होने पर परिजनों को उसे हरोली या क्षेत्रीय अस्पताल ले जाना पड़ता है। इससे समय और धन खर्च होने के साथ मरीज को समय पर उपचार मिलने को लेकर भी चिंता बनी रहती है।
स्थानीय निवासी पवन कुमार, राजेश कुमार, राम प्रकाश, नेहा कुमारी, रीता देवी, रीना कुमारी, प्रदीप चौधरी और नेक राम ने मांग की कि अस्पताल में रात्रिकालीन सेवाएं दोबारा शुरू की जाएं। इसके लिए जरूरी स्टाफ और अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि आसपास के गांवों के लोगों को अपने क्षेत्र में ही उपचार मिल सके।
कोट
आयुर्वेदिक अस्पताल ईसपुर में रात के समय आपातकाल स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने के लिए उच्च अधिकारियों से स्टाफ की मांग की है। स्टाफ की तैनाती होने पर ही सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
डॉ. किरण शर्मा, जिला आयुष अधिकारी ऊना