नैहरियां (ऊना)। मैड़ी होली मेले में बाहरी राज्यों से मालवाहक वाहनों में मौत का सफर जारी है। प्रदेश के प्रवेश द्वारों पर पुलिस कार्रवाई करने की बजाय मूकदर्शक बनी है।
सबसे बड़ा प्रश्न है कि अगर हिमाचल प्रदेश के प्रवेश द्वारों मैहतपुर, गगरेट आशा देवी बैरियर, मरवाड़ी, पंडोगा बैरियर पर मालवाहक वाहनों में श्रद्धालुओं के आने पर पूर्ण प्रतिबंध है तो फिर यह गाड़ियां कैसे प्रवेश कर रही हैं और वहां पर तैनात पुलिस के जवान क्या कर रहे हैं। न तो प्रशासन इस पर अंकुश लगा पाया है और न ही श्रद्धालु सबक ले रहे हैं।
प्रदेश के मंदिरों और बाबा बड़भाग सिंह मेला मैड़ी आने वाले भक्त चंद पैसे बचाने के चक्कर में अपनी जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं। मालवाहक वाहनों में सफर कर रहे हैं जो कि कानूनन जुर्म है।
कानून की धज्जियां तो उड़ ही रही हैं, प्रशासन है कि बस चालान काट कर अपनी ड्यूटी निभा देता है। ज्यादातर श्रद्धालु पंजाब और हरियाणा राज्यों से आते हैं। इकट्ठे होकर मालवाहक गाड़ी करते हैं और निकल पड़ते हैं। अगर प्रशासन हिमाचल के प्रवेश द्वारों पर ही इन मालवाहक वाहनों को रोक दे तो हादसों पर अंकुश लग सकता है। हरसौर में हुए हादसे से पहले भी प्रदेश में कई हादसे हो चुके हैं।
तीन वर्ष पूर्व भी उपमंडल अंब के ठठल में बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें काफी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए और कई जान गंवा बैठे। बड़े-बड़े मालवाहक वाहनों के कारण स्थानीय लोगों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों को भी दुर्घटना का डर बना रहता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश चौधरी का कहना है मालवाहक वाहनों में श्रद्धालुओं को लेकर आना पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह पैदा करता है। अंब चौक में दुकानदार मंगत शर्मा का कहना है कि प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मालवाहक वाहन अंब बाजार से श्रद्धालुओं को लेकर गुजरते हैं। ग्राम पंचायत ज्वार की 65 वर्षीय कांता देवी का कहना है कि सड़क छोटी होने के कारण लगभग तीन वर्ष पूर्व मालवाहक वाहन ने उनके मकान की दीवार को तोड़ दिया था। नैहरियां बाजार में कन्फेक्शनरी दुकानदार दीपक कुमार का कहना है बाजार से बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं गुजरती हैं, बड़े-बड़े मालवाहक वाहनों में श्रद्धालु आने से दुर्घटना का डर बना रहता है