भारी बारिश से किसानों के खेतों में भरा पानी
खेतों के साथ बहते नालों में आए उफान ने फसल को लिया अपनी चपेट में
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। मूसलाधार बारिश ने क्षेत्र में भारी नुकसान किया है। बीते शुक्रवार देर रात से शनिवार शाम तक हुई तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया है। मक्की की फसल बर्बाद हो गई है। किसान खेतों से पानी निकालने में जुटे हुए हैं। तेज बहाव के कारण नाले उफान पर हैं, जिससे मक्की, चरी, बाजरा और अन्य फलदार पौधों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। हालांकि रविवार को मौसम में कुछ राहत मिलने से किसानों ने थोड़ी राहत की सांस ली। कृषि विशेषज्ञ सतपाल धीमान ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से हर पंचायत से किसानों की फसलों के नुकसान का आकलन करवाया जा रहा है, ताकि उचित मुआवजा दिया जा सके।
किसानों की पीड़ा, उन्हीं की ज़ुबानी
सिहाणा से कुलदीप सिंह ने कहा -किसान करें तो क्या करें। कभी जंगली जानवरों का आतंक तो कभी मौसम का कहर। बारिश के कारण फसलें पानी में तैरती नजर आ रही हैं।
खैरियां से जोगेंद्र सिंह ने कहा कि मक्की की फसल में बहुत मेहनत लगती है, लेकिन आख़िर में वही कहावत सच हो जाती है-आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपया'। अब बारिश ने भी रही-सही कसर पूरी कर दी।
मलांगड से अजीत डोगरा ने बताया कि लगातार हुई भारी बारिश से जनजीवन के साथ-साथ खेतों में खड़ी मक्की की फसल को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरा हुआ है।
खरयालता से सुरेश ठाकुर ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा -पहले महंगे ट्रैक्टर से बिजाई, फिर महंगे बीज, खाद, कीटनाशक और खरपतवार नियंत्रण की दवाइयों का खर्च उठाया। इसके बाद जंगली जानवरों का आतंक झेला। अब प्राकृतिक आपदा ने फसल पर कहर ढा दिया। यही कारण है कि किसान धीरे-धीरे खेती से मुंह मोड़ रहे हैं।