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Una News: उच्च शिक्षा के लिए लिया स्टडी फ्री लोन नौकरी लगी, 26 साल बाद भी नहीं लौटाया

Fri, 17 Jul 2026 12:25 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए महिला विकास निगम ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के युवाओं के लिए शिक्षा ऋण योजना के तहत ऋण तो प्रदान कर दिया लेकिन लाभार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के 26 साल बाद भी ऋण की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं।
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उच्च शिक्षा प्राप्त करके नौकरी भी हासिल कर ली लेकिन अब ऋण की राशि लाभार्थी नहीं लौटा रहे हैं। महिला विकास निगम ने ऊना जिला के ऐसे स्वरोजगार से जुड़े अन्य योजनाओं के सात लाभार्थियों को डिफाल्टर घोषित किया है और कई बार नोटिस भी जारी किया है। ऋण की राशि भी कई गुना बढ़ गई है।
महिला विकास निगम ऊना के अधिकारी और कर्मचारी फील्ड असिस्टेंट बलविंद्र कुमार कई बार व्यक्तिगत तौर पर लाभार्थियों के घर पहुंचे। यहां तक की गारंटी देने वालों से भी बातचीत की लेकिन आज दिन तक ऋण की अदायगी नहीं की गई है। स्वरोजगार के लिए प्राप्त किए गए ऋण में दो लाभार्थी बीटन, दो ऊना, एक चिंतपूर्णी, एक सलोह बैरी और एक अन्य क्षेत्र से संबंधित है।
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इनमें से ही एक लाभार्थी ने वर्ष 2000 में 30 हजार रुपये उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऋण प्राप्त किया और आगे उच्च शिक्षा प्राप्त करके अच्छी खासी नौकरी भी कर रहे हैं लेकिन ऋण अदायगी नहीं की। जो कि बढ़कर अब 52 हजार रुपये तक पहुंच गई है जबकि कुछ लाभार्थियों की मौत भी हो गई है। जिसके चलते ऋण की वसूली लटक गई है।
बता दें कि निगम अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के युवाओं को मैट्रिक के बाद तकनीकी विषयों और व्यवसाय में पढ़ाई के लिए अधिकतम 75000 का ऋण ब्याज मुक्त व 75000 से 150000 तक 4% वार्षिक ब्याज पर उपलब्ध कराता है। शिक्षा ऋण के तहत आदवेक छात्र माता-पिता व विभागों के बीच सहऋणी होते हैं। योजना केवल उन्हें परिवारों के विद्यार्थियों के लिए है, जिनकी परिवार की वार्षिक आय एक लाख से अधिक न हो।
इस योजना में डिप्लोमा और डिग्री कोर्स के लिए ऋण देने की सुविधा है। महिला विकास निगम ऊना की जिला प्रबंधक नीलम कुमारी का कहना है कि स्वरोजगार के लिए योजना के तहत सात डिफॉल्टरों को कई बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इनमें से एक केस शिक्षा ऋण योजना के तहत भी जारी किया गया था।
लाभार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करके नौकरी भी कर रहा है लेकिन आज दिन तक ऋण की अदायगी नहीं की है। इसमें कुछ की मृत्यु हो गई है और कई गारंटर से भी पूछताछ के दौरान सामने नहीं आए हैं। इसके चलते ऋण की वसूली लटक कर रह गई है। आगामी कार्यवाही के लिए मसले को निगम के आला अधिकारियों को भेज दिया है।
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