बडूही (ऊना)। शिवपुराण महाकथा के पांचवें दिन आचार्य कन्हैया जोशी ने भगवान भोलेनाथ की कथा सुनाई। कथा में बताया गया कि माता पार्वती के विवाह पर राजा हिमांचल ने भव्य भोज का आयोजन किया। सभी देवता और राक्षस भोजन कर चुके थे, लेकिन राजा हिमांचल के मन में अपनी क्षमता पर अभिमान उत्पन्न हो गया। तभी भगवान भोलेनाथ आए और कहा कि पहले शुक्र और शनि को भोजन कराया जाए। जब वे खाने लगे, तो सारी रसोई का भोजन समाप्त हो गया, फिर भी उनका पेट नहीं भरा। यह देखकर राजा हिमांचल को अपनी भूल का बोध हुआ और उन्होंने भगवान शिव के चरणों में नतमस्तक होकर क्षमा याचना की। भोलेनाथ ने उन्हें कुछ चावल के दाने दिए, जिससे भंडार पुनः भर गया।
आचार्य जी ने गोदान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। बताया कि इसे महादान माना जाता है क्योंकि गाय में देवताओं का वास होता है और इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। कथा के बाद भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण हुआ।