ऊना में यूजीसी के विरोध के दौरान उपायुक्त ऊना जतिन लाल को मांग पत्र सौंपते हुए विभिन्न संगठनों
ऊना। ऊना जिले में सोमवार को यूजीसी बिल के विरोध में सवर्ण समाज ने सड़कों पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतरे और रोष मार्च निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में विभिन्न धार्मिक संगठनों ने भी सवर्ण समाज का समर्थन करते हुए भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़-धर्मशाला राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब दो किलोमीटर लंबा रोष मार्च निकालते हुए जिला उपायुक्त कार्यालय तक मार्च किया। रोष मार्च के दौरान केंद्र सरकार के साथ-साथ स्थानीय सांसद के खिलाफ भी मुर्दाबाद के नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी बिल को हिंदू समाज को विभाजित करने वाला करार देते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस बिल को लाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। बाद में सवर्ण समाज के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा ताकि यह मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाई जा सके। सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सवर्ण समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी पवन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार यह कदम देश के लिए खतरनाक है।
जिला ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष चंद्र शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट की अस्थायी रोक का स्वागत किया। करणी सेना महिला अध्यक्ष पूजा ठाकुर ने कहा कि जिस समाज ने हमेशा राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व दिया। आज केंद्र की मोदी सरकार उसी समाज की अनदेखी कर उनके अधिकारों को छीनने का प्रयास कर रही है। सेना का उद्देश्य किसी भी जाति या वर्ग का विरोध करना नहीं है, क्योंकि उनका समाज हमेशा से सभी वर्गों के साथ प्रेम और सद्भाव के साथ रहता आया है। उन्होंने कहा कि वे सर्व समाज के हितों और आपसी भाईचारे के समर्थक हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सवर्ण जातियों के खिलाफ होने वाले पक्षपात को चुपचाप सह लिया जाए। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपनी नीतियों के माध्यम से युवाओं को जातियों में विभाजित करने का काम कर रही है। उच्चतम न्यायालय द्वारा यूजीसी के इस निर्णय पर रोक लगाए जाने के कदम का स्वागत करते हुए उन्होंने न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस विवादित संशोधन को बिना किसी देरी के तुरंत वापस लिया जाए।
वहीं अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष तनुज ठाकुर ने सरकार के इस कदम को सवर्ण समाज के हितों के साथ खिलवाड़ बताते हुए इसे पूरी तरह सवर्ण विरोधी करार दिया है।