मास्टर ट्रेनर मीना कुमारी ने 20 महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
देसी गुड़ 100 रुपये और शक्कर 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही
सतीश शर्मा
नारी (ऊना)। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। हरोली की मीना कुमारी ने गुड़ और शक्कर का उत्पादन कर न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने साथ अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाया है।
बटूही पंचायत निवासी मीना कुमारी इन दिनों हरोली क्षेत्र की लगभग 20 महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही हैं। इस दौरान मीना कुमारी स्वयं भी प्रति माह आजीविका कमा रही हैं। वहीं, उनके साथ जुड़ी महिलाएं इस सीजन में गुड़ और शक्कर के उत्पादन से प्रति माह 20 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं।
मीना कुमारी के अनुसार हरोली क्षेत्र में महिलाएं दो स्वयंसेवी समूहों के तहत यह कार्य कर रही हैं। वह स्वयं गन्ने की खेती भी करती हैं और प्रत्येक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर आय अर्जित कर रही हैं। देसी गुड़ 100 रुपये प्रति किलो और शक्कर 150 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है। सड़क पर गुजरने वाले लोग विशेषकर शहरों से आए ग्राहक देसी गुड़ और शक्कर को बहुत पसंद कर रहे हैं। कई लोग तो थोक मात्रा में इसे खरीदते भी हैं।
कुछ वर्ष पहले यह कार्य केवल पुरुष ही किया करते थे, लेकिन अब महिलाओं ने इसकी बागडोर अपने हाथ में ले ली है। महिलाओं ने गन्ने की खेती को अपने स्वरोजगार का मुख्य साधन बना लिया है, जिससे घर का खर्च आसानी से चलता है।
मास्टर ट्रेनर मीना कुमारी का कहना है कि गन्ने की घर पर खेती करने में लागत कम और मेहनत अधिक होती है। हर सीजन महिलाओं को नगदी फसलों से आय अर्जित करने के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े। यह महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।