हरी सब्जियों और मक्की की फसल बुरी तरह प्रभावित
खेतों में जरूरत से आधी नमी बनी फसलों के लिए अभिशाप
किसानों को अब आने वाली फसल दो माह के आलू से उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में जुलाई और अगस्त की लगातार बारिश से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। कई खेतों में जलभराव होने से खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। हरी सब्जियों और मक्की की फसल को बचाने का किसानों को उचित समय नहीं मिल सका। अतिरिक्त नमी और कीटों के प्रकोप ने भी फसलों को नुकसान पहुंचाया। जिले में जून के अंतिम दिनों से शुरू हुआ बारिश का दौर अगस्त तक जारी है। वर्तमान में किसानों ने लगभग 1000 हेक्टेयर में अगेती मक्की और करीब 25,000 हेक्टेयर में पारंपरिक मक्की बोई हुई है, जिनमें से करीब 30 प्रतिशत फसल चौपट हो चुकी है। वहीं भिंडी, करेला, बैंगन, घिया, कद्दू और खीरे जैसी हरी सब्जियां भी जलभराव और कीट के हमलों की चपेट में आ गईं।
किसानों मनजीत सिंह, प्रिंस कुमार, सतिंद्र सिंह, राजकुमार, अभिलाश कुमार, रणवीर सिंह ने बताया कि नगदी फसलों में पौधे फूल आने की स्थिति में थे, लेकिन लगातार बारिश ने हालात बिगाड़ दिए। बारिश रुक-रुककर होने से समय पर कीटनाशक छिड़काव भी संभव नहीं हो पाया। इससे जुलाई से ही सब्जियां खराब होने लगीं। वहीं, जलभराव वाले खेतों में मक्की बिना दाना लगे ही सूख गई। जहां फसल तैयार है, वहां भी उत्पादन सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम है। ऊपर से बाजार में उचित कीमत भी नहीं मिल रही। किसानों का कहना है कि जुलाई और अगस्त की भारी बारिश ने उनकी मेहनत पूरी तरह पर पानी फेर दिया। जिला कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि कई क्षेत्रों से फसलों के नुकसान की रिपोर्ट मिली है। विभागीय टीमें मौके पर जाकर निरीक्षण कर रही हैं। जल्द ही नुकसान का आकलन कर राहत के विकल्प तलाशे जाएंगे।