ऊना। चिंतपूर्णी के नारी क्षेत्र की रीना ठाकुर अपना बुटीक चलाकर हर महीने 35000 रुपये कमा रही हैं। साथ ही अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं। दसवीं पास रीना ठाकुर ने 17 वर्ष की आयु से ही सिलाई कढ़ाई के साथ ब्यूटीशियन का काम करने का शौक रखा और घर परिवार की आर्थिक तंगी के चलते रीना ठाकुर ने बुटीक चलाकर स्वरोजगार शुरू किया।
घर परिवार के कामकाज को निपटाकर रीना ठाकुर महिलाओं को भी स्वरोजगार के साथ जोड़कर उनकी आर्थिकी सुदृढ़ कर रही हैं। रीना ठाकुर का कहना है कि उन्होंने इस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार की कोई बड़ी पढ़ाई नहीं की है। मन में शौक और काम के प्रति लगन और मेहनत से रीना ठाकुर ने इस क्षेत्र में अपना नाम चमकाया है और सोशल मीडिया यू-ट्यूब के माध्यम से ही दिनोंदिन इस क्षेत्र के कामकाज में आ रहे बदलाव को सीखकर अपने हुनर को तराशा।
रीना ठाकुर के कामकाज से महिलाएं खासी प्रभावित हैं। बहन सीमा से प्रेरणा पाकर आज रीना ठाकुर इस मुकाम पर पहुंची हैं कि पिछले तीन सालों से खुद के पैरों पर खड़ा होकर परिवार की स्थिति को भी सुदृढ़ किया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां महिलाएं गलत चलन के चलते मेहनत के लिए शॉर्ट कट तरीका अपनाकर कामकाज कर रही हैं, उससे तो बेहतर है कि अपने हुनर को पहचानें और स्वरोजगार की राह पर चलें।
रीना ठाकुर के पति निजी काम करते हैं जबकि परिवार में बेटा दिव्यांग है और बेटी आठवीं में पढ़ती है। उन्होंने कहा कि उनके मायके में परिवार की स्थिति आर्थिक तौर पर ठीक नहीं थी तो दसवीं के बाद उन्हें पढ़ने का अवसर नहीं मिला। वह कबड्डी की भी एक अच्छी खिलाड़ी रही हैं।