भक्तियोग आश्रम अम्ब की नैहरियां में श्रीमद् भागवत कथा सुनते हुए भक्तजन।स्रोत आयोजक
ऊना। भक्तियोग आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी अतुल कृष्ण जी महाराज ने जीवन में निश्चिंतता प्राप्त करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि निश्चिंतता ईश्वर में विश्वास रखने से ही आती है। संसार के सभी काम पूरे करके कोई नहीं मरा और जो पूरे करने के भ्रम में रहते हैं, उनका कोई न कोई काम अधूरा रह जाता है। परमात्मा को छोड़कर जो बुद्धि संसार की चीजों के लिए लगाता है, वह ठगा ही रहता है।
उन्होंने कहा कि सबकी उन्नति, सबकी प्रसन्नता, सबका आनंद, सबका कल्याण मेरा कल्याण है। क्योंकि सब भिन्न-भिन्न दिखते हैं। परंतु वास्तव में सब एक हैं। मेरे शरीर में जैसे अंग भिन्न-भिन्न हैं। परंतु मैं एक हूं। आत्मा परमात्मा का सनातन अंश है। उस चेतना को जागृत करने के लिए उपासना पद्धतियां भिन्न-भिन्न हैं। परमात्मा से जो संसार की क्षुद्र चीजें मांगता है, वह धोखे में है।
स्वामी अतुल कृष्ण ने कहा कि भगवान नाम की महिमा अपार है। भगवान का मंगलकारी नाम दुखियों के दुख और रोगियों का रोग मिटा सकता है। प्रभु का पावन नाम पापियों का पाप हर लेता है, अभक्त को भक्त बना देता है और मुर्दे में भी प्राण का संचार कर सकता है। मंगलवार को कथा में श्रीवामन अवतार, गजेंद्र मोक्ष, मत्स्य अवतार, भगवान श्रीराम का चरित्र एवं लीला पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग लोगों ने अत्यंत श्रद्धा से सुना।
भक्तियोग आश्रम अम्ब की नैहरियां में श्रीमद् भागवत कथा सुनते हुए भक्तजन।स्रोत आयोजक