ऊना। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माप-तौल विभाग को अपना सिर छिपाने के लिए स्थायी सरकारी दफ्तर नहीं मिल पाया है। वर्तमान में धर्मशाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर बस अड्डे के साथ सटी दुकान में माप-तौल विभाग का दफ्तर चल रहा है। सरकार को सालाना करोड़ों रुपये का राजस्व जुटाने वाला विभाग सरकारी दफ्तर न होने की सूरत में खुद कंगाल साबित हो रहा है। दफ्तर की हालत भी दयनीय बनी हुई है। जगह-जगह रंग निकल गया है। बदहाल व्यवस्था में स्टाफ मजबूरी में कामकाज निपटने को विवश है। आम जनता की सुविधा के लिए दफ्तर के बाहर बड़े-बड़े दो बोर्ड टांगे गए हैं। माप-तौल विभाग ऊना के कार्यालय में निरीक्षक के अलावा दो अन्य कर्मचारी भी विभाग ने कामकाज को निपटने के लिए अनुबंधित किए हैं। ऊपर से दुकानों का निरीक्षण करने से लेकर पेट्रोल पंप और उद्योग इकाइयों के उपकरणों की जांच पर का जिम्मा भी इसी विभाग के सिरे है। वहीं दूसरी ओर इंडियन ऑयल का डिपो ऊना में होने की सूरत में भी स्टाफ को रोजाना तमाम तरह की प्रक्रिया की निगरानी करनी होती है। ऐसे में जब तमाम कामकाज को निपटने के बाद दफ्तर में स्टाफ पहुंचता है तो वहां पर बदहाल शटरनुमा दुकान में चल रहे दफ्तर में काम करना पड़ रहा है। वहीं रोजाना यहां पर कांटे बट्टे सहित अन्य उपकरणों के सत्यापन करवाने के लिए कारोबारी पहुंचते हैं, वह भी दफ्तर का दृश्य देखकर इधर-उधर ही खड़े नजर आते हैं।
ऐसा भी नहीं है कि विभाग के पास दफ्तर को सही जगह संचालित करने के लिए जगह नहीं है। एक ओर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का दफ्तर मिनी सचिवालय में संचालित है, तो वहीं दूसरी ओर माप-तौल विभाग का कार्यालय नेशनल हाईवे किनारे दुकान में चलने से प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी लोगों ने सवाल खड़े किए हैं।
माप-तौल विभाग के इंस्पेक्टर राहुल सेठी का कहना है कि खाद्य आपूर्ति विभाग का दफ्तर मिनी सचिवालय में है। ऐसे में माप-तौल विभाग का दफ्तर सड़क के किनारे दुकान में संचालित किया जा रहा है। इस दिशा में उपयुक्त जगह में दफ्तर का संचालन करने के लिए पहल की जाएगी। इसकी प्रक्रिया विभागीय स्तर पर चल रही है।
व्यापार मंडल ऊना के प्रधान प्रिंस राजपूत का कहना है कि सरकार को माप-तौल विभाग के दफ्तर का अन्य जिलों की तर्ज पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के साथ ही एक ही परिसर में संचालन करना चाहिए ताकि आम जनता को एक ही छत तले दोनों विभागों की सुविधा मिल सके।