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Una News: अंबोटा पंचायत के विभाजन पर घमासान तेज

Fri, 06 Mar 2026 06:28 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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अम्बोटा पंचायत विभाजन पर विशेष ग्राम सभा में दो पंचायतों के समर्थन में प्रस्ताव केदौरान एकत्र
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गगरेट (ऊना)। विकास खंड गगरेट की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत अंबोटा को तीन पंचायतों में विभाजित किए जाने के प्रस्ताव को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। वीरवार को ग्राम पंचायत अंबोटा के सैकड़ों वाशिंदों ने विशेष ग्राम सभा आयोजित कर स्पष्ट रूप से दो पंचायतों के गठन के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया और उसे उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश सरकार को भेज दिया।
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ग्राम सभा में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि अंबोटा पंचायत को तीन हिस्सों में बांटना क्षेत्रहित में नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि चतेहर पंचायत के साथ अंबोटा, शिवबाड़ी और जंदबड़ को मिलाकर एक पंचायत बनाई जाए जबकि शेष क्षेत्र को दूसरी पंचायत के रूप में संगठित किया जाए। ग्रामीणों का तर्क है कि दो पंचायतों के गठन से प्रशासनिक कार्यों में संतुलन रहेगा और विकास कार्यों को गति मिलेगी।


डम्मी प्रधान बनकर रह जाएगा प्रतिनिधि
ग्रामीणों अश्वनी ठाकुर, सुरिंद्र सिंह कंवर, हरदीप सिंह, सूबेदार सर्वजीत सिंह, रंजीत सिंह, कैप्टन कश्मीर सिंह, पूर्व प्रधान जगजीत सिंह, मनु ठाकुर, प्रिंस ठाकुर, पंकज ठाकुर और राजेश ठाकुर सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि यदि अंबोटा पंचायत में केवल अंबोटा उप मुहाल ही शेष रहता है तो पंचायत के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होगी। ऐसे में प्रधान केवल नाममात्र का प्रतिनिधि बनकर रह जाएगा।
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उन्होंने बताया कि अंबोटा के अधिकांश लोगों की भूमि शिवबाड़ी मुहाल में स्थित है। यहां तक कि गांव के बुजुर्गों ने जिन शिक्षण संस्थानों के लिए अपनी जमीन दान में दी थी, वे संस्थान भी प्रस्तावित पुनर्गठन के बाद दूसरी पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में चले जाएंगे। इसी तरह द्रोण महादेव मंदिर और श्मशानघाट भी अन्य पंचायतों में शामिल हो जाएंगे जिससे स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत होंगी।


पते बदल जाएंगे, पहचान मिट जाएगी
ग्रामीणों ने भावुक स्वर में कहा कि पंचायत विभाजन के बाद कई लोगों के आधिकारिक पते बदल जाएंगे और आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों से अंबोटा का नाम सदा के लिए हट जाएगा। यह गांव की ऐतिहासिक पहचान पर आघात होगा। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में प्रदेश सरकार से मांग की गई है कि तीन पंचायतों के बजाय दो पंचायतों का गठन किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने हक की लड़ाई जारी रखेंगे।
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