ऊना। जिले में स्कूलों की मनमानी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भारी-भरकम स्कूल बैग का बोझ बच्चों की नाजुक रीढ़ पर असर डाल रहा है। अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट हिदायत जारी की है कि स्कूल केवल आवश्यकता वाली किताबें ही बच्चों से मंगवाएं।
शिक्षा विभाग ने खासकर निजी शिक्षण संस्थानों को चेताया है कि वे मनमाने तरीके से अतिरिक्त किताबें और सहायक सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव न डालें। विभाग का कहना है कि कई स्कूल निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग अतिरिक्त गाइड, वर्कबुक और प्रकाशकों की किताबें सूची में जोड़ देते हैं, जिससे न केवल बैग का वजन बढ़ता है बल्कि अभिभावकों पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में अधिक वजन का बैग उठाने से बच्चों में पीठ दर्द, कंधे झुकने और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए बैग का वजन उनके शरीर के कुल वजन के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए लेकिन कई स्कूलों में यह सीमा पार हो रही है।
आगामी सत्र से चलेगा जांच अभियान
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से किताबों की सूची की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक स्कूल से कक्षा वार पुस्तक सूची मांगी जाएगी और यह देखा जाएगा कि केवल बोर्ड द्वारा निर्धारित या स्वीकृत पुस्तकें ही शामिल हों। नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि किसी स्कूल द्वारा अनावश्यक किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है तो इसकी सूचना संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दें।
स्कूलों से पत्राचार भी किया जा रहा है। इस सख्ती से उम्मीद जताई जा रही कि बच्चों के बैग का बोझ कम होगा और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ वातावरण में पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। इसको लेकर जमीनी स्तर पर भी निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।
-सोमलाल धीमान, उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग