ऊना। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत बनाई जा रही आभा आईडी को लेकर स्वास्थ्य विभाग का अभियान जिले में लगातार जारी है। विभागीय प्रयासों के बावजूद अभी भी जिले के करीब दस प्रतिशत लोगों ने अपनी आभा आईडी नहीं बनवाई है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि कामकाज और रोजगार के सिलसिले में जिले से बाहर रहने वाले लोगों के कारण शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने में कठिनाई आ रही है। जिले में करीब 5.50 लाख लोगों की आभा आईडी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले के अधिकांश लोगों की आभा आईडी तैयार की जा चुकी है लेकिन कुछ लोग अभी भी इस प्रक्रिया से नहीं जुड़े हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो रोजगार, शिक्षा अथवा अन्य कारणों से लंबे समय से जिले से बाहर रह रहे हैं। विभाग द्वारा बार-बार जागरूक किए जाने के बावजूद इन लोगों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रही है। लक्ष्य को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशा वर्करों को भी सक्रिय भूमिका सौंपी है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को आभा आईडी के महत्व की जानकारी दे रही हैं और जिन लोगों की आईडी नहीं बनी है उन्हें इसे जल्द बनवाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य संस्थानों में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी आभा आईडी बनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। बता दें कि आभा आईडी के माध्यम से मरीजों का डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सकता है। जिससे उपचार के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को सुविधा मिलती है।
जिले से बाहर रहने वाले लोगों को भी आभा कार्ड बनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। अभी भी 10 प्रतिशत लोगों ने आभा कार्ड नहीं बनाए हैं। जिले से बाहर रहने वाले लोगों से आग्रह है कि वह अपना आभा कार्ड जरूर बनवाएं।
-दीपक कुमार, समन्वयक, आभा कार्ड अभियान, ऊना