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Una News: संकट में पंजाबी विषय की पढ़ाई, 22 स्कूलों में अध्यापकों ही नहीं

Wed, 02 Oct 2024 07:03 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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नारी (ऊना)। जिला ऊना के स्कूलों में पंजाबी विषय की पढ़ाई संकट में है। इसका कारण 22 स्कूलों में पंजाबी अध्यापकों की कमी है। अध्यापकों की कमी के कारण पंजाबी विषय का अध्ययन जुगाड़ के सहारे चल रहा है। पंजाब राज्य के साथ सटे होने के कारण इस क्षेत्र के युवाओं के लिए पंजाबी विषय का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
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शिक्षा विभाग ने 37 स्कूलों में पंजाबी विषय को स्वीकृति दी है औऱ पढ़ाया भी जा रहा है। मगर इनमें से 15 स्कूलों में ही पंजाबी अध्यापक कार्यरत हैं, जबकि 22 स्कूलों में पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति पिछले 14 वर्षों से चल रही है। यानी 14 वर्षों से किसी भी पंजाबी अध्यापक की नियुक्ति नहीं हुई है। कक्षा 6 से 8 तक पंजाबी विषय ड्राइंग के विकल्प के साथ और कक्षा 9 से 10 तक पंजाबी की जगह संस्कृत को विकल्प के रूप में रखा गया है।
स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधान और अभिभावकों में सुशील कुमार, महेश चंद, नरेश कुमार, सुमन कुमारी, साधुराम, सतपाल, राधे कृष्णा, हर्ष कुमार और ममता रानी ने कई विद्यालयों में पंजाबी अध्यापकों का पद सृजत ही नहीं है, लेकिन वहां बच्चे दूसरे शिक्षकों के सहारे पंजाबी विषय पढ़ रहे हैं। हरोली विधानसभा क्षेत्र में 15 ऐसे स्कूल हैं, जहां पंजाबी अध्यापक के पद सृजत हैं। मगर पढ़ने वाला बच्चा ही कोई नहीं।
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उन्होंने कहा कि जहां विद्यार्थी पंजाबी पढ़ना चाहते हैं, वहां पर पद सृजित किए जाएं। इसके साथ ही जहां पंजाबी अध्यापकों के पद खाली चल रहे हैं वहां तैनाती की जाए। वहीं, जिला पंजाबी अध्यापक संगठन के जिला अध्यक्ष बेअंत सिंह का कहना है कि जिस विद्यालय में 10 बच्चे पंजाबी पढ़ना चाहते हैं, वहां प्रशासन पंजाबी अध्यापकों के पद सृजित करके अध्यापकों की शीघ्र नियुक्ति करें।

पंजाबी विषय के अध्यापकों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ मामला विभाग के संज्ञान में है। खाली पदों का विवरण विभाग को पहले भेजा जा चुका है। जैसे ही नियुक्तियां होगी, उन्हें तत्काल अमल में लाया जाएगा।
- सोम लाल धीमान, प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक, ऊना
पंजाबी और उर्दू शिक्षकों के खाली पदों की समस्या सरकार के ध्यान में है। शिक्षा विभाग से आंकड़े लेकर कैबिनेट के समक्ष रखें जाएंगे। इसके बाद समस्या का समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर चर्चा की जाएगी।
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-रोहित ठाकुर, शिक्षा मंत्री
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