नारी (ऊना)। यदि मन में कुछ करने की इच्छा शक्ति हो तो हर व्यक्ति अपनी मेहनत से लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण है बहडाला की सुदेश कुमारी, जिन्होंने ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ जुड़कर पीएनबी आरसेटी से प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद घर पर ही बड़ियां, पेठा बड़ियां और कतीरा तैयार करके स्वरोजगार का साधन बनाया। वर्तमान में वह हर महीने 12 से 15000 रुपये कमा लेती हैं। उन्होंने गांव की ही अन्य 10 महिलाओं को प्रशिक्षित कर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया। प्रशिक्षण पाने वाली महिलाएं भी 6000 से 8000 रुपये प्रति महीना कमा रही हैं।
सुदेश कुमारी का कहना है कि बड़ियां बनाने के लिए उड़द और मूंगी की दाल को भिगोकर दूसरे दिन बारीक पेस्ट बनाकर उनमें मसाले डाले जाते हैं। पेठा बड़ी में पेठे को छीलकर उसका पानी निकला जाता है। इसमें उड़द की धुली दाल को मिलाया जाते है। मसाले में धनिया, जीरा, सौंफ, काली मिर्च, दालचीनी, लौंग, इलायची को पीसा जाता है। इन्हें मिलाकर पेठा बड़ी तैयार की जाती है। इसके अलावा गेहूं को पानी में भिगो दिया जाता है। अगले दिन उसका पानी निकालकर मशीन के माध्यम से घर पर ही गेहूं का रस निकाल लिया जाता है। उस रस को सुखाकर जो पाउडर बनता है, उसमें प्रोटीन, खनिज तथा अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह उत्पाद हर प्रकार की पेट की बीमारियों तथा कमजोरी को दूर करता है। यह एक प्रकार की आयुर्वेदिक औषधि बन जाती है। इसमें थोड़ी सी कूजे की मिश्री मिलाकर दूध के साथ लेने से हर प्रकार की कमजोरी दूर होती है।
सुदेश कुमारी का कहना है कि घर पर ही सभी उत्पाद तैयार हो जाते हैं। उच्च गुणवत्ता की बड़ियां 350 रुपये प्रति किलो और कतीरा 450 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से बिकता है। स्थानीय स्तर पर बिक्री कम होती है। खंड विकास अधिकारी कार्यालय से जुड़े होने से ऑनलाइन बिक्री हो जाती है। क्षेत्र की महिलाएं भी सीखने में रुचि ले रही हैं। उनके स्वरोजगार का कुछ न कुछ साधन बन गया है। यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक अच्छा संकेत है।