नक्की गांव में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन
श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से सराबोर रहा अंतिम दिवस
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब की ग्राम पंचायत ठठल के गांव नक्की में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का समापन भक्ति, श्रद्धा और भावनाओं के अनुपम संगम के साथ हुआ। अंतिम दिन कथावाचक स्वयमानंद गिरि की ओर से भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का मार्मिक वर्णन किया गया। इसमें उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
स्वयमानंद गिरि ने कहा कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा जब अपने बचपन के सखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचे तो उनके पास भेंट स्वरूप केवल मुट्ठी भर चावल थे। किंतु भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें राजकीय सम्मान देते हुए गले लगाया, पांव धोए और बिना कुछ कहे ही उनकी गरीबी हर ली। यह प्रसंग इस बात का प्रतीक है कि ईश्वर अपने भक्त की सच्ची भावना को ही प्राथमिकता देते हैं, न कि उसकी भौतिक स्थिति को। उन्होंने कहा कि सुदामा की झोपड़ी से द्वारका तक की यात्रा यह दर्शाती है कि सच्ची मित्रता, भक्ति और आत्मिक संबंध किसी भी सामाजिक भेदभाव से परे होते हैं।कथा के अंत में कलियुग के लक्षणों का वर्णन करते हुए बताया कि इस युग में केवल हरिनाम संकीर्तन ही मोक्ष का साधन है। साथ ही, भागवत कथा श्रवण और मनन से जीवन में शांति, भक्ति और सद्गति प्राप्त होती है। समापन अवसर पर विधिवत हवन और यज्ञ का आयोजन हुआ, जिसमें गांव के वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया।