दिनरात के मौसम में भारी अंतर से फसलें हो रहीं प्रभावित
किसानों ने कहा- मौसम में बड़े अंतर से फसलों को बीमारी का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में दिन और रात के मौसम में भारी अंतर से जहां लोगों को परेशानी हो रही है वहीं, किसानों को फसलें बचाने के लिए भी कड़ी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। फरवरी के शुरुआती दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री तो रात के समय न्यूनतम पारा पांच डिग्री सेल्सियस के करीब रह रहा है। यह फसलों के दृष्टिकोण से ठीक नहीं। किसानों का कहना है कि ऐसे मौसम में फसलें काफी प्रभावित होती हैं। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में गेहूं और आलू की फसल को बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहेगा।
जानकारी के अनुसार आलू और गेहूं की फसल तैयार होने में चार माह का समय लगता है। फरवरी तक सर्दी का प्रभाव रहने से किसानों को सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव में अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती। इस वर्ष फरवरी में सर्दी का प्रकोप दिन के समय लगभग खत्म है। जिससे फसलों की लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। खासकर आलू की फसल की लगातार सिंचाई करनी पड़ रही। दूसरी ओर मौसम में भारी अंतर से फसलों में बीमारी लगने का डर सता रहा है। किसान समय रहते फसलों पर खाद व कीटनाशकों का छिड़काव कर रहे हैं।
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गुड़ाई के बीच सिंचाई करना चुनौती
किसानों जयदीप सिंह, शमिंद्र राणा, सुखदेव सिंह, अजय कुमार ने कहा कि वर्तमान समय आलू की गुड़ाई का है। बड़े खेतों में गुड़ाई के साथ सिंचाई का कार्य भी करना पड़ रहा है। जहां खेत पूरी तरह से सूख चुके हैं, वहां गुड़ाई से पहले और बाकियों में गुड़ाई के बाद सिंचाई की जा रही है। किसानों ने कहा कि उन्हें आने वाले दिनों में गर्मी के प्रकोप को लेकर चिंता सता रही है। आलू और गेहूं के फसल की वृद्धि के लिए सर्दी का मौसम अच्छा माना जाता है लेकिन इस बार गर्मी की मार अधिक है।
फसलों पर विपरीत मौसम का असर अक्सर देखने को मिलता है। आलू और गेहूं सर्द मौसम में अच्छे तरीके से तैयार होते हैं। फसलों के पकने के लिए गर्मी का मौसम ठीक माना जाता है। हालांकि, बीते दिनों बारिश हुई है लेकिन दिन में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। किसान फसलों पर पूरी नजर बनाए रखें। खासकर आलू की फसल में सिंचाई समय समय पर करना जरूरी है।
डॉ कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।