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Una News: चक गांव में लावारिस गोवंश बना ग्रामीणों के लिए मुसीबत

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फसलें बर्बाद, तारबंदी भी तोड़ देते हैं सांड, प्रशासन और पंचायत उदासीन
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संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। उपमंडल अंब की पंचायत बेहड़ जसवां के अंतर्गत गांव चक के ग्रामीण लावारिस गोवंश की समस्या से मुश्किल में हैं। खेतों में घुसकर फसलें बर्बाद करना और रात को दुकानों के आगे या सराय भवन में आराम फरमाना इन पशुओं की दिनचर्या बन गई है। ग्रामीणों ने खुद के खर्चे पर खेतों की तारबंदी की है। इसके बावजूद भारी-भरकम सांड इन अवरोधों को तोड़ते हुए खेतों में दाखिल हो जाते हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीणों को अब दिन-रात खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। कई बार ये सांड इतने उग्र हो जाते हैं कि खेतों में काम कर रहे किसानों को मारने के लिए दौड़ पड़ते हैं, जिससे लोगों की जान पर भी बन आती है।
चक गांव में स्थित पुराना सराय भवन इन लावारिस पशुओं के लिए एक तरह से अस्थायी गोशाला बन चुका है। यह भवन अब जर्जर अवस्था में है और किसी भी समय गिर सकता है। इससे जान-माल का खतरा और बढ़ सकता है। यहां रात को सांड व गायें आराम करती हैं और सुबह होते ही खेतों की ओर रुख कर देते हैं। दुकानदारों की दुकानों के आगे बने टीन शेड भी अब इन पशुओं का विश्राम स्थल बन गए हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की ओर न तो पंचायत ध्यान दे रही है और न ही प्रशासन। अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। गांव के किसान दिन-रात की मेहनत के बाद भी फसलों को बचा नहीं पा रहे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
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किसान अशोक कुमार, ऋषि कपिला, अनिल, अशोक कुमार, सतीश चौधरी, राजेश, दर्शन सिंह, काकू ने बताया कि खेतों की निगरानी के लिए रात को भी पहरा देना पड़ता है, वरना सुबह तक खेत खाली हो जाते हैं। हमने तारबंदी की, लेकिन सांड तोड़ देते हैं। अब तो खेतों में जाना भी खतरे से खाली नहीं है। एक अन्य ग्रामीण सुनीता देवी ने कहा कि सराय भवन अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। वहां लावारिस पशु जमा रहते हैं। कई बार पंचायत और अधिकारियों को बता चुके हैं पर कोई सुनवाई नहीं हुई। रात के समय लावारिस पशु घरों में भी घुस जाते और घर में रखे पशुओं से भिड़ जाते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। पंचायत प्रधान नीलम कुमारी का कहना है कि जल्द ही संबंधित विभाग के अधिकारियों और गोशाला संचालकों से भी बात की जाएगी। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
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