ऊना। शिक्षा विभाग ने हाल ही में 37 शिक्षा उप निदेशक के पदों पर पदोन्नति की, लेकिन इस प्रक्रिया में अजीब शर्तें लागू की गईं। पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठता के मापदंड को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। जिन प्रधानाचार्यों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम समय बचा था, उन्हें सूची से बाहर रखा गया। हालांकि तीन ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया गया, जिनकी सेवानिवृत्ति एक वर्ष से भी कम समय में है।
यह बात हिमाचल प्रदेश लेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान दविंदर सिंह बेली, महासचिव शशि सैनी, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष राकेश मल्होत्रा, प्रांतीय सचिव राजन शर्मा, राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास रत्न, संजीव शर्मा, संजीव चौधरी सहित अन्य ने सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति संयुक्त बयान में कही। उन्होंने पदोन्नति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि ऊना के वरिष्ठ प्रधानाचार्य राजेंद्र कौशल मार्च 2024 से शिक्षा उप निदेशक का अतिरिक्त कार्य संभाल रहे थे, उनको भी सूची से बाहर कर दिया गया। राजेंद्र कौशल से कनिष्ठ प्रधानाचार्यों को उप निदेशक बना दिया गया, जबकि कौशल की सेवानिवृत्ति के समय चार्ज सौंपने के दौरान एक वर्ष से अधिक का समय बचा था। शिक्षा उपनिदेशक का पद वरिष्ठता के अनुसार ही दिया जाता है परंतु इस तरह की स्थिति विभाग पहली बार ही देख रहा है।
हिमाचल प्रदेश लेक्चरर एसोसिएशन इस निर्णय पर नाराजगी जाहिर करते हुए प्रक्रिया को अनुचित करार दिया है। साथ ही एसोसिएशन ने पदोन्नति प्रक्रिया को पारदर्शी और वरिष्ठता के आधार पर लागू करने की मांग की है।