बैकुंठ चतुर्थी की पावन संध्या पर गगरेट की सोमभद्रा नदी आस्था के दीपों का प्रवाह करती महिलाएं। स
- फोटो : बहराइच में मालगोदाम रोड पर चलते वाहन के पीछे लटके लोग।
गगरेट (ऊना )। बैकुंठ चतुर्थी की पावन संध्या पर गगरेट की सोमभद्रा नदी श्रद्धा और आस्था के दीपों से आलौकिक हो उठी। सैकड़ों महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर, थालियों में दीपक और पुष्प सजाकर नदी तट पर पहुंचकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चारण और शंखनाद की पवित्र ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। जैसे ही महिलाओं ने दीप प्रवाहित किए, नदी की लहरों पर तैरते दीप मानो श्रद्धा और समर्पण की कहानी कह रहे थे।
चारों ओर दीपों की झिलमिलाहट, भजनों की मधुर स्वर लहरियां और अगरबत्ती की सुगंध ने पूरे माहौल को दिव्यता से भर दिया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और कल्याण की कामना की।
आस्था और उत्साह से परिपूर्ण इस अविस्मरणीय शाम का समापन राधे-श्याम मंदिर प्रांगण में हुआ, जहां 365 दीपक प्रज्वलित कर लक्ष्मी-नारायण को अर्पित किए गए। ग्रामीणों ने बताया कि बैकुंठ चतुर्थी पर दीपदान और ज्योति अर्पण की यह प्राचीन परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज में एकता, संस्कृति और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश भी देती है।