ऊना। एसएफआई ऊना इकाई ने प्रधानाचार्य के माध्यम से विश्वविद्यालय के कुलपति को मांग पत्र भेजा। इसमें यूजी/पीजी परीक्षा परिणाम जल्द घोषित करने और 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं करवाने की मांग की गई।
इकाई अध्यक्ष राजिंद्र कुमार ने कहा कि महामारी के कारण 2020 में सभी शिक्षण संस्थान बंद थे। इसकी वजह से ऑनलाइन कक्षाएं महज औपचारिकता के रूप में हुई। प्रदेश में नेटवर्क की कमी के कारण बहुत से छात्र ऑनलाइन क्लासेज नहीं लगा पाए। एसएफआई ने मांग की कि 50 प्रतिशत पाठ्यक्रम के आधार पर परीक्षाएं कराई जाएं। इसके साथ पीजी और यूजी एग्जाम के परिणाम शीघ्र घोषित करें। प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष शिक्षा पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला लिया है।
महाविद्यालय में जीएसटी के तहत फीस लेना शुरू कर दिया है। जहां प्रदेश सरकार को शिक्षा पर 30 प्रतिशत बजट खर्च करना चाहिए था। सरकार उसका उलट शिक्षा को आम जनता से दूर करने की कोशिश कर रही है। सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था के हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसे दुरुस्त करने के लिए बजट बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन सरकार के केंद्रीय बजट में पिछली वर्ष के मुताबिक इस वर्ष शिक्षा क्षेत्र में 6 प्रतिशत की कटौती दर्ज की गई है। निजी शिक्षण संस्थानों को लाभ देने के लिए ग्रेड के आधार पर शिक्षा संस्थानों को ऑटोनॉमिस संस्थान घोषित किया जा रहा है।
शिक्षा के बजट को दिन प्रतिदिन खत्म किया जा रहा है। रूसा प्रणाली को हिमाचल में लागू करने के परिणाम हम सभी आज देख रहे हैं। अब भाजपा सरकार हिमाचल में एनईपी को लागू करने जा रही है। इसका एसएफआई ने कड़ा विरोध किया।