अलैहड़ अंब में श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन किए प्रवचन
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। अहंकार की हर जीत हार है। हमारी अपूर्णता के पीछे नासमझी भरी मान्यताएं ही कारण हैं। मन की मृत्यु का नाम ही मौन है। परमात्मा की खोज में साहस और धैर्य की आवश्यकता होती है। बिना साहस के सत्य की तलाश मुश्किल है। अगर हम चाहते हैं कि आकाश की ऊंचाइयां मिलें तो एक अनिवार्य शर्त है अहंकार का विसर्जन।
उक्त अमृत वचन श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिवस में परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने अलैहड़ अंब में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सितारों से आगे जहां और भी है। संसार प्रभु तक जाने की सीढ़ी है। मनुष्य सारे अस्तित्व का चौराहा है। परमात्मा पोथी से नहीं प्रेम से उपलब्ध होता है। कागजों में परमात्मा से मिलन नहीं हो सकता। परमात्मा से मिलन करना हो तो अपनी स्वयं की चेतना की सीढ़ियों में उतरना पड़ेगा। एक घड़ी भी ब्रह्म विचार कर लेने से सैकड़ों तीर्थों में स्नान करने, सैकड़ों यज्ञ एवं हजारों कपिला गाय दान करने का फल मिलता है। आज कथा में भगवान श्री कृष्ण की अनेक बाल लीलाएं, महारास, कंस वध एवं श्री रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सभी ने अत्यंत तन्मयता से सुना। इस अवसर पर अनेक मनमोहक झांकियां भी निकाली गईं।