चिकित्सकों और बिस्तरों के अभाव में रेफरल अस्पताल बना सरकाघाट
आपातकाल में मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर किया जा रहा रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
सरकाघाट (मंडी)। उपमंडलीय अस्पताल सरकाघाट में चिकित्सकों और बिस्तरों की कमी के कारण यह अब रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है। नए भवन का निर्माण कार्य अधूरा होने के चलते मरीजों का उपचार अभी भी पुराने और जर्जर भवन में ही किया जा रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद नेरचौक मेडिकल कॉलेज, हमीरपुर, एम्स बिलासपुर, टांडा (पालमपुर) और क्षेत्रीय अस्पताल मंडी रेफर किया जाता है, जिससे कई बार मरीजों की जान पर भी बन आती है। अस्पताल में पिछले करीब दो वर्षों से रेडियोलॉजिस्ट, सर्जन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और ईएनटी विशेषज्ञ के पद खाली पड़े हैं। इस कारण लोगों को इलाज के लिए दूरदराज के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। आर्थिक रूप से सक्षम लोग निजी अस्पतालों में उपचार करवा लेते हैं, जबकि गरीब मरीजों को बिना उपचार ही रहना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने दो माह पूर्व राज्यभर के अस्पतालों में नए चिकित्सकों की नियुक्ति की थी, लेकिन सरकाघाट अस्पताल में रिक्त पद अब तक नहीं भरे गए हैं। इस संबंध में एसएमओ डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि चिकित्सकों की तैनाती और अन्य समस्याओं के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार और विभागीय स्वीकृति मिलने के बाद ही नियुक्तियां संभव हैं। वहीं, स्थानीय विधायक दलीप ठाकुर का कहना है कि यदि कोई चिकित्सक यहां तैनात होता भी है, तो उसका दो माह के भीतर ही तबादला कर दिया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों से नए भवन का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। भवन के पूर्ण होने पर यहां 150 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कांग्रेस नेता पवन ठाकुर ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में यहां नाममात्र के चिकित्सक थे, जबकि वर्तमान सरकार के दौरान 13 चिकित्सकों की तैनाती की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही अन्य रिक्त पद भी भरे जाएंगे।
स्थानीय निवासी धनीराम ने बताया कि अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने के कारण मरीजों को निजी क्लीनिकों में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ रही है, जबकि अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन बेकार पड़ी है।
संजीव शर्मा निवासी नबाही ने कहा कि सर्जन के अभाव में पथरी, रसौली और पेट से संबंधित बीमारियों के मरीजों को एम्स बिलासपुर और नेरचौक मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दो माह पहले एक सर्जन की नियुक्ति हुई थी, लेकिन जल्द ही उसका तबादला कर दिया गया।
मनोहर लाल, निवासी मसेरन ने बताया कि उनकी बुजुर्ग माता को स्त्री रोग संबंधी समस्या है और उन्हें हर माह मेडिकल कॉलेज ले जाना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकाघाट अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाए, तो क्षेत्र की महिलाओं को बड़ी राहत मिल सकती है।