जिला स्तरीय कार्यक्रम में ऊना के शहीद स्मारक पर अर्पित की श्रद्धांजलि
बलिदानियाें के योगदान को सदैव याद रखें : जतिन लाल
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ पर जिला स्तरीय कार्यक्रम एमसी ऊना के शहीद स्मारक में करवाया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उपायुक्त जतिन लाल और विशेष अतिथि के रूप में शहीद कैप्टन अमोल कालिया के पिता सतपाल कालिया और शहीद राइफलमैन मनोहर लाल के भाई यशपाल ने शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक अमित यादव, सहायक आयुक्त वरिंद्र शर्मा, नगर निगम के संयुक्त आयुक्त मनोज कुमार, जिला सैनिक कल्याण विभाग के उपनिदेशक (रि.) कर्नल एसके कालिया, (रि.) कर्नल डीपी वशिष्ठ, (रि.) कर्नल केबी शर्मा, पूर्व सैनिक लीग के अध्यक्ष (रि.) कैप्टन शक्ति चंद सहित पूर्व सैनिकों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी शहीद स्मारक पर बलिदानियों को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उपायुक्त जतिन लाल ने कहा कि कारगिल युद्ध जैसी वीरता की मिसाल दुनिया में दुर्लभ है। भीषण ठंड और विपरीत परिस्थितियों के बीच हमारे सैनिकों ने शौर्य और साहस का परिचय देते हुए विजय हासिल की। उनका यह बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना का अदम्य साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शहीदों से प्रेरणा लेकर देश सेवा का संकल्प लें, शारीरिक फिटनेस पर ध्यान दें और नशे से दूर रहें। कार्यक्रम के बाद उपायुक्त ने डीआरडीए सभागार में पूर्व सैनिकों की चाय पर मेजबानी की। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने उन्हें अपनी विविध मांगों से अवगत कराया। उपायुक्त ने उनकी सभी मांगों को गौर से सुना तथा तत्काल उनको पूरा करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।
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भारतीय सेना के शौर्य की अमर गाथा है कारगिल युद्ध
कारगिल युद्ध में हिमाचल प्रदेश के 52 वीर सपूतों ने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनमें ऊना जिले के दो वीर सैनिक कैप्टन अमोल कालिया और राइफलमैन मनोहर लाल भी शामिल थे। उनके अदम्य साहस को देश सदैव स्मरण करता रहेगा।
कारगिल युद्ध में चार परमवीर चक्र प्रदान किए गए थे। इन चार में से दो परमवीर चक्र प्रदेश के ही शूरवीरों को मिले, शहीद कैप्टन विक्रम बतरा (मरणोपरांत) और सूबेदार मेजर (तत्कालीन सिपाही) संजय कुमार। इन रणबांकुरों की शौर्यगाथा पर संपूर्ण देश और प्रदेश को गर्व है।