देश भर से उमड़ी भीड़ के चलते अमृत स्नान किया रद्द
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मैहतपुर (ऊना)। मौनी अमावस्या के दिन बुधवार को प्रयागराज में देशभर से उमड़ी भीड़ के चलते अखाड़ा परिषदों की ओर से अमृत स्नान को श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रद्द करने के फैसले का स्वागत किया गया। क्षेत्र के प्रबुद्धजनों का मानना है कि यही सनातन संस्कृति है जो हमें -अतिथि देवो भव का संदेश देती आई है। इससे पूर्व अखाड़ा परिषदों के इस प्रकार के निर्णय देखने को नहीं मिले, जब देश भर से आए श्रद्धालुओं ने अमृत स्नान संत समाज अखाड़ा परिषदों के बिना पूर्ण किया हो। कुंभ की सनातन परंपरा में सबसे प्रथम अधिकार अखाड़ा परिषदों और संत समाज का ही माना जाता रहा है, लेकिन इस बार इस महाकुंभ में पुरातन परंपरा हमारे संत समाज ने बदली है।
हरिद्वार अटल अखाड़ा में भारत साधु समाज के महामंत्री एवं भागवताचार्य रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि मौनी अमावस्या पर स्नान करने वालों की अत्यधिक भीड़ को देखते हुए संत समाज ने अमृत स्नान को रद्द करके देश भर से आ रहे श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो, इसलिए उन्हें स्नान करने के लिए पहले आमंत्रित किया है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था।
वशिष्ट ज्योतिष सदन के ज्योतिषाचार्य पंडित शशिपाल डोगरा ने कहा कि अमृत स्नान को रद्द करके आम श्रद्धालुओं को स्नान में प्राथमिकता देना यही भारतीय सनातन संस्कृति की खूबसूरती है। ऊना में डेरा बाबा रुद्रानंद धाम के महंत हेमानंद ने कहा कि प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर हमारे संत समाज तथा अखाड़ा परिषदों के महामंडलेश्वरों ने शासन-प्रशासन का सहयोग करते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए अमृत स्नान को रद्द किया, ताकि देश दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
हिमाचल ब्राह्मण सभा के संरक्षक पंडित शिव किशोर वासुदेव, महामंत्री पंडित एसआर अवस्थी, शिवसेना के प्रांतीय अध्यक्ष शिवदत्त वशिष्ठ सहित अनेक प्रबुद्ध लोगों ने प्रयागराज महाकुंभ में संत समाज के फैसले का स्वागत करते हुए इसे अतिथि देवो भव की परंपरा का निर्वहन बताया है।